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क्यों उंगली उठाऊं

 ःःःः। क्यों उंगली उठाऊं ःःःः उंगली उठाऊं क्यों तुम पे, उपयोग किया मेरा तुमने। कुछ तो बात है मुझमें, जो लाखों मे मुझे चुना तुमने।। अपनी किस्मत का खेल कहूं, या समय का हेरफेर। झूठ सच को ठग गया, झूठा पा गया सच्चा प्यार।। तुन्हें मतलब अपने मतलब से, तुन्हें क्या प्यार से।। तुम लूट के भी खुश नहीं,  मैं खुशी से पागल हूं सब लुटा के प्यार में प्यार से।। कहते हैं वे, क्या था तुम्हारे पास, जो लुट गए। कैसे समझाऊं, उस नासमझ को कि। धन, किसी को, मान.सम्मान, समय किसी को। तो प्यार किसी की दौलत होती है।।        ःः ःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः