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Showing posts from April, 2023

काळु-तिल

 : :::"काळु-तिल"::::       ######## गोरी पंगळदक मुखड़ि, सोना पै सुहागु, तेरु काळु-काळु तिल, तेरु काळु-काळु तिल।। नौणै सी गोंदिगि, सुर्ख गळोड़ियू,स्वाणु लगदु, तेरू गैरु-गैरु पिल, तेरू गैरु-गैरु पिल ।। ठुमक-ठुमक हिटदु, नागिन सी धौंपेलि, तेरी इनै-उनै हिल, धौंपेलि तेरी इनै-उनै हिल।। औंदु-जांदु देखणू त्वे, दाना-सयणौं की भी, आंखि-कंदुड़ि चिल, आंखि-कंदुड़ि चिल।। हर दिलै धड़कन, हर दिल मा बसी, हर क्वी चांदु, मैं अकेला मिल, मैं अकेला मिल।। गोरी पंगळदक मुखड़ि, सोना पै सुहागु, तेरु काळु-काळु तिल, तेरु काळु-काळु तिल।।           :::: कल्याण सिंह चौहान "दिल":::

दौन-खार

  :: :: "दौन- खार" :: :: ####₹₹₹₹₹##### दौन-खारै झौळ अफु फुके, फुके आपणी मौ। आप्त-मित्र भै-बंद झुलस्या, झुलसि सरु गौं।। दौन-खार माटा दब्यूं मोरु, खारा दबी आग। होण-खाणै मति खांद, खांद होदु-खांदु भाग।। हुर्स्या-हुर्स्सि मौ बणि, ह्वे अपणु ब्वे-बब्बू नौ। दौन-खार घाम लगि, अपणि होंद-खांद मौ।। दौन-खार भितर कौंकु धुर-धुर, भ्यार कौंकु यौ-यौ। जाणा दिनु अपणा लगन बैरि, भ्यारा लगन सौ।। दौन-खारौ दुर्योधन बालि रावण, ह्वेन गर्क। नि रैन दिया-बत्ती बळणू, न लेंदरा क्वी नौ।। दौन-खारै झौळ अफु फुके, फुके आपणी मौ। आप्त-मित्र भै-बंद झुलस्या, झुलसि सरु गौं।।       :: :: कल्याण सिंह चौहान "दिल" :; ::

ऋतु तीन

  ## ऋतु तीन ## बारह मैनौं की, गर्मी सर्दी वर्षा ऋतु मा ह्वे बंटाई। बसन्त ग्रीष्म, बरखा शरद, हेमन्त शीत उप ऋतु होई।। फुलेरा चैत-बैशाख, सतरंगी चदरी ओडै धरती। हंसदु-खेलदु मदमस्त, ऋतु राज बसन्त छाई।। तपदा जेठ-अषाड़, सुखदा होंठ तड़फदा प्राणी। त्राहि-त्राहि मचै, ऋतु ग्रीष्म आग बरसौंदु आई।।  सौणै स्वाती, भादौं राती, धरती तीस बुझौणू। ऋतु राणि बरखा, झमाझम बरखदी धाई।। असूज-कातिक उमस भोरियां दिन, जाणू कू। कुरकुरया ठंड औणा का बीच, ऋतु शरद आई।। ओंसै सफेद चदरी, मंगसीर-पूष धरती छाई। जगदी आग, ऊनी कपड़ा, ऋतु हेमन्त सुहाई।। मौ-फागुन ह्वे हिंवळी, बोलदन पोड़ि गेंहुवळी। चसू हड्डिगियूं, ठिठुरदा गात, ऋतु शीत/शिशिर आई।। बारह मैनें की, गर्मी सर्दी वर्षा ऋतु मा ह्वे बंटाई। बसन्त ग्रीष्म, बरखा शरद, हेमन्त शीत उप ऋतु होई।।               ## कल्याण सिंह चौहान "दिल" नोट:- बसंत पंचमी मौ महीने में आती है। मौसम में भी बहुत बदलाव हो रहा है।