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Showing posts from September, 2021

नचण दिया मैं आज

 ःःःः  नचण दिया मैं आज ःःःः         ःःःःःःःःःःःःः सरको सरको सर सर, शबसे. शबसे सर सर, मण्डाण घनाघोर, ढोल दमौ जोरशोर, झेंकु झेंता, झें.झें, ता.ता, शबसे शबसे, सरको सरको सर सर, शबसे. शबसे सर सर। अईंच शुभ घड़ी, शुभ बार, आज हमरा घौरबार, नाचो.नाचो सर सर, सरको सरको सर सर, शबसे. शबसे सर सर। भैजी लईंंच बौ, बणै ब्यौलि अपणु प्यार, शबसे. शबसे सर सर, सरको सरको सर सर, शबसे. शबसे सर सर। खूब नचण मिन आज, हैंसि खेली, फिरकुणा चार, पकोड़ी. पकोड़ी सर सर, शबसे. शबसे सर सर। आज क्वी मैं, रोकु न टोकु, बरसु बाद अयूं, खुशी मौकू, सरको सरको सर सर, शबसे. शबसे सर सर।         ःःः  कल्याण सिंह चौहान ःःः

दारु भोरी आंखी

 ःःःः  दारु भोरी आंखी ःःः        ःःःःःःःःःःःःः तेरी दारू भोरी आंखी सुमन, बणै गैनी शराबी मैं, बस मा नी मन मेरू, लगीगे लत तेरी मैं। तेरी दारू भोरी आंखी सुमन,........... तेरा रसीला होंठ सुमन, बणै गैनी तिसोलूऊ मैं, बुझदी नी तीस मेरी, पिलै दे पाणी मैं, तेरी दारू भोरी आंखी सुमन,........ तेरी स्वाणी प्यारी मुखूड़ि सुमन, बणै गे उनींदू मैं, आंख्यूं बसिगे मुखड़ि तेरी, ऐकि सिवै जै मैं, तेरी दारू भोरी आंखी सुमन,.......... तेरु देखी रंग रूप सुमन, ह्वेगि बौल्याट मैं, लगदु नी कखि ज्यू मेरू,  अपणि मुखड़ि दिखै जै मैं, तेरी दारू भोरी आंखी सुमन,  बणै गेन शराबी मैं।।           ःः  कल्याण सिंह चौहान  ःः

दो प्रेमी

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  ःःःः  दो प्रेमी - DO PREMI ःः           ःःःःःः ऐ छुपछुप के देखने वाले, कभी खुल के भी देख ले। हमें भी रहता है इंतजार तेरा, बस इतना तू जान ले।। किसी की आंखों का झुकना, बहुत कुछ कहता है। कोई लज्जा, कोई इज्ज़त, कोई इसे प्यार कहता है।। एक दूसरे के संकेत दोनों प्रेमी ही समझे, तो प्यार है। कोई और समझे प्रेमियों के संकेत तो बदनाम प्यार है।। तुम बातें करते हो किसी और से, संदेश हमें होता है। प्यार पढ़ लेता है संदेश, अगर कागज कोरा भी होता है।।         ःः  कल्याण सिंह चौहान ःः              ःःःःःःःःःःःःःःः

कुमौ गढ़ै पुष्पा

 ःःःः  कुमौ गढ़ै पुष्पा ःःःः            ःःःःःःःःःः कुमौ गढ़ की पुष्पा हे पुष्पा, कनु स्वाणु प्यारु तेरु रंग रूप, कनु स्वाणु प्यारु तेरु रंग रूप, कुमौ गढ़.....।। पूर्णमसी जोन मुखड़ी तेरी हे पुष्पा, लाल बिंदूली माथा झिलमिल, कुमौ गढ़ की पुष्पा हे पुष्पा, कनु स्वाणु प्यारु तेरु रंग रूप।। कालि कुएड़ि खुली लटूली तेरी हे पुष्पा, बंदी धौंपेली कालु गुरौ, कुमौ गढ़ की पुष्पा हे पुष्पा, कनु स्वाणु प्यारु तेरु रंग रूप।। होंठ तेरा फूल बुरांस हे पुष्पा, दांतु पाटि चमकदी बिजली, कुमौ गढ़ की पुष्पा हे पुष्पा, कनु स्वाणु प्यारु तेरु रंग रूप।। आंखी रत्न्याली मस्त तेरी हे पुष्पा, करदी घौ कतली सी, कुमौ गढ़ की पुष्पा हे पुष्पा, कनु स्वाणु प्यारु तेरु रंग रूप।। गलोड़ि हिंसरै गोदंगी तेरी हे पुष्पा, कुलैंई सी छड़छड़ी बांद तू, कुमौ गढ़ की पुष्पा हे पुष्पा, कनु स्वाणु प्यारु तेरु रंग रूप।।      ः ः कल्याण सिंह चौहान ःः

अकेले हूं

 ःःःः  अकेले हूं ःःःः        ःःःःःःःःःः न कोई साथ था, न कोई साथ है, न कोई साथ होगा। छलावा है सब, साथ है सबका, सबका साथ होगा।। मलमूत्र युक्त अंधकूप से निकला मैं, चीरता अंधेरा। दण्डवत कर प्रणाम, खूब रोया देख माया का घेरा।। जीवन सफर मे, कुछ लोग जुड़ते, कुछ छूटते रहे। एक पड़ाव आया सफर मे, जहां बहुत रुकना पड़ा। कुछ कर्ज उतारने, कुछ जिम्मेदारियां निभाने। कुछ से लगाव हुआ, कुछ से जुड़ना पड़ा।। जोश चढ़ती जवानी, उभाल गर्म खून का था। चेहरे पे पैंसौं की लाली, बहुतों का मैं प्यार था।। यौवन के खिले रंग रूप का,  हर कोई दिवाना है। झुर्रियों युक्त लटकते चेहरे से, करता कौन प्यार है।। दांत आंख कान, अंग अंग शिथिल होते गए। थकता शरीर, नित नियम चलता सफर। पत्नी बच्चे घर पे ही छूटे, भाई बंधु सब शमशान। अकेले ही अंतिम सफर पर, निकले अकेले प्राण।। आगे भी, पीछे भी प्राण, दांये भी, बांये भी प्राण। उपर भी, नीचे भी प्राण, बीच मे भी प्राण ही प्राण।। न कोई साथ था, न कोई साथ है, न कोई साथ होगा। छलावा है सब, साथ है सबका, सबका साथ होगा।।             ......कल्याण सिं...