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तुम न सही

     "तुम न सही"  न मर्यादा बोली-भाषा की, न था शब्द-अर्थ का ज्ञान, प्यार से पहले, कागज-कलम से भी, था मैं अंजान, "दिल", कागज, कलम मित्र हुए, है तुम्हारा अहसान।। तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही --- कसूर बताए बिना, अचानक चौराहे छोड़ने वाले, ठीक कहा किसी ने, तुम न सही, कोई और सही, तुम्हारी बेरुखी, और कलम मेरी सहेली हो गई।। तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही --- चोरी छिपे बात/ मुलाकात/ वासना से प्यार बदनाम, है अमर प्रेम, बिन चाह, आत्म मिलन खुले आसमान, तुम्हें ही, लिखता हूं तुम्हें, बिना लिए तुम्हारा नाम।। तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही ---- एक कड़वी सच्चाई यह भी है, मेरे जीवन में,  झूठ है, तुम्हारे सिवाय कोई नहीं, मेरे जीवन में, सच्ची-पक्की सहेली है, मेरी मौत, मेरे जीवन में।। तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही --- सच कहूं, यह भी एक सच्चाई है, मेरे जीवन में, तुम्हारा रूठना-मनाना, एक हिस्सा था, मेरे जीवन में। बिछड़े जो, तुम्हारी यादों के कुछ नहीं, मेरे जीवन में।। तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही ---            # कल्याण सिंह चौहान "दिल"...

बारह ज्योतिर्लिंग

              "बारह ज्योतिर्लिंग "            ########## रोम-रोम सोमनाथ जपे, जपे अंग-अंग मल्लिकार्जुन शिव। शिव शंभू, शिव शंभू जपे, जपे जय जय शिव शंकर।। हृदय महाकालेश्वर शिव जपे, जपे ओंकारेश्वर शिव । शिव शंभू, शिव शंभू जपे, जपे जय जय शिव शंकर।। आती श्वांस वैद्यनाथ जपे, जपे जाती भीमशंकर शिव । शिव शंभू, शिव शंभू जपे, जपे जय जय शिव शंकर।। एक आंख रामेश्वर नाथ जपे, जपे एक नागेश्वर शिव शिव शंभू, शिव शंभू जपे, जपे जय जय शिव शंकर।। भृकुटी मध्य विश्वनाथ जपे, जपे त्रंबकेश्वर  शिव। शिव शंभू, शिव शंभू जपे, जपे जय जय शिव शंकर।। ब्रह्मण्ड केदारनाथ जपे, जपे घुश्मेश्वर नाथ शिव।  शिव शंभू, शिव शंभू जपे, जपे जय जय शिव शंकर।।                                         कल्याण सिंह चौहान "दिल"