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Showing posts from April, 2021

तुम और वह ( शराब )

ःः ःः तुम और वह ( शराब )  ःःःः          ःःःःःःःःःःःःःःःः तुम्हारा प्यार जो मिला, दोस्त खफा हो बैठे। तड़फाने नाम लेकर तुम्हारा उपहास कर बैठे।। अलग हमें तुम से करने की, साजिश कर बैठे। कसम देकर तुम्हारी, उससे मेरी दोस्ती करा बैठे।। पाने तुम्हें मै, अपना सब कुछ दांव लगा बैठा। नफरत थी जिससे, उसे ही अपना बना बैठा।। माना कि मैं गलत था, अपने होश गंवां बैठा। तुम तो होसोहवास मे थीं, क्यों गलती कर बैठी। सच है तुम्हारा नाम लेकर, कमस ली थी हमने। बहकावे मे आ के गैरों के, तुम क्यों रूठ बैठी।। रूठ कर मनाने से मान जाने को, प्यार कहते हैं। कुछ पाने नहीं, सब कुछ लुटाने को, प्यार कहते हैं।।          ःः  कल्याण सिंह चौहान ःः

मुक्ति द्वार

 ःःःः  मुक्ति द्वार ःःःः    ःःःःःःःःःःः मादक मंद पवन का झोखा, छेड़ गया मन के तार। खुशबू उन्मत उसकी, मैं श्वास लू छोड़ू भूल गया।। हल्की आहट उसके कदमों की, कानों मिश्री घोले। आती हर आहट पर, धड़कना दिल का बढ़ गया।। दोस्त बदलते हैं लोग, अपनी जरूरतों के हिसाब से।  दोस्त नहीं जरूरतें बदली मैंने, दोस्ती के हिसाब से ।। चाहत मेरी, एक झलक देख पाने की सूरत उसकी। मेरे अंतरमन के विश्वास का, पक्का सहारा हो गया।। देखी जो मन मे बसी सूरत, मैं होसोहवास खो बैठा। क्या नजारा था वह, "दिल" पलक झपकना भूल गया।। जीवन भर लवों पर ही, गुनगुनाता रहा जो नाम। अंतिम छणों वही "राम" नाम, मुक्ति द्वार हो गया।।         ःः  कल्याण सिंह चौहान। ःः

भकल उम्र

ःःःः  भकल उम्र ःःःः         ःःःःःःःःःः भकल उम्र छै मेरी, 17-18 सालै की, दाड़ि छै न मोच, फिकर छै न सोच, नई उमंगै, उडान रोज।। भकल उम्र ...।। जिन्दगी मा ऐ एक मोड़, मचैगि तोड़फोड, बरखै सी रोड़खोड़, नि चली क्वी जोड़तोड़।। भकल उम्र छै मेरी, 17-18 ....।। सुपन्या ह्वेन चकनाचूर, सदन्यू ह्वेगि घपरोल, कंधा पोड़िगि हौळज्यू, लगिगि जनु जोळ।। भकल उम्र छै मेरी, 17-18 ...।। समणि खड़ि ज्वनी देल, मुण्ड धरेगि भारु बोझ, खेलणु कुदुणु छूटि, भेल पाखा लमड़ि जनु होड़।। भकल उम्र छै मेरी, 17-18..।। कुड़िपुंगड़ि चलदु करणू, ह्वेगि मेरि मांगुणौ जोड़, ब्बै बब्वी क्वी छुंईं न बत, बस मेरा भ्यौ की रौड़।। भकल उम्र छै मेरी, 17-18 ...।। मेरु भ्यौ ह्वे ग्याई, मेरी दुनिया बदल ग्याई, भकल उम्र छै मेरी, 17-18 सालै की।।            ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः

मेरी हमसफर

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   ःःःः  मेरी हमसफर - MERI HUMSAFAR ःःःः           ःःःःःःःःःः तुम कहती हो, मुझे कुछ बताते नहीं, बताता हूं तो कहती हो, मुझे पता है।। तुम्हीं मेरा सवाल भी, तो जबाब भी हो। बिछड़े परिजनों का, तुम संयुक्त रूप हो।। मेरी हर खुशी, हर सुबह, सांम तुम्ही हो। दुःख सुख की साथी, राजदार तुम्ही हो।। मेरी खुशियों को, अपने को भुला बैठी हो। ईंट पत्थर के मकान को, मंदिर बना बैठी हो।। दुनिया बहुत नामों से, पुकारती है तुम्हें। शिव प्रियसी का मन्जू नाम, जचता है तुम्हें।।         ःःः। कल्याण सिंह चौहान। ।ःः

सौंजड़्या

 ःःःः। सौंजड़्या ।ःःःः         ःःःःःःःः तु बोलदे, मैं मा कुछ नि बतौंदा तुम, बतौंदु छौं त, बोलदे मैं पता च सौब।। मेरू सवाल भी त्वी त, जबाब भी त्वी छैं, कुटुमा बिछड़यां अपणौ कु, एकरूप त्वी छैं।। मेरी खुशी त्वी, मेरी सुबेर ब्यखन भी त्वी छैं। मेरी लगौण्यां पठौण्यां, राजदार भी त्वी छैं।। मेरी खुशियों कु, अफी तै भुली बिसरी छैं। गारामाटा कूड़ा, घौर बणौणवली भी त्वी छैं।। दुनिया बनिबन्यां नौ से, बुलौंदि त्वे। शिवा कु मन्जू नौ ही, अच्छू लगदु त्वे।।         ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः

गुप्त बात

 ःःःः गुप्त बात ःःःः    ःःःःःःःःःःः भवसागर मन डोले, प्यार की है गुप्त बात।  प्रेमी या प्रियसी से, होगी अनोखी मुलाकात।। अलौकिक पिया का, साक्षात दिव्य दर्शन। उस पल मे, जी जाऊंगा मैं जीवन अनंत।। शांति से छूट जाऐंगे, माया के रिस्ते बंधन। सुखदायक  प्रिय का वह, स्नेह आलिंगन।। साधारण मनुष्य क्या, तपस्वी भी तपरत इनके। अभिलाषी सब प्रभु दर्शन, मृत्यु वसीकरण के।। मृत्यु प्रियसी मेरी, करूं तुम्हें प्रेम समर्पण। प्रभु आराध्य मेरे, करूं अपना मन अर्पण।।        ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः