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Showing posts from October, 2020

मगर

 ।।ःः मगर ःः।। आंख रोऐं मगर, आंशू प्यार के हों। हार जाऐं मगर, खुशी  जीत की हो। जुदाई हो मगर, विदाई बेटी की हो।। अंधेरा हो मगर, रात सुहाग की हो। गिर जाऐंं मगर, जज्बा उठने का हो। दूर हों मगर, अपने दिल के करीब हों।। सर झुकाऐं मगर, चरण प्रभु श्री राम के हों। सर ऊंचा हो मगर, सर पे पिता का हाथ हो। खुश होऐं मगर, खुशी अपनों के साथ हो।।       ःःःः  कल्याण सिंह चौहान ःःःः

प्यार का भरोसा

 ।।ःः प्यार का भरोसा ःः।।        ःःःःःःःःःःः प्यार हूं, तेरे प्यार का भरोसा चाहता हूं मैं, प्यार हूं, तेरे होंठों को छूना चाहता हूं मैं।। प्यार हूं, तेरे ख्यालों मे रहना चाहता हूं मैं, प्यार हूं, प्यार मे तेरा होना चाहता हूं मैं।। प्यार हूं, तेरे नाम से जुड़ना चाहता हूं मैं, प्यार हूं, तेरे प्यार के साथ रहना चाहता हूं मैं।। प्यार हूं, तेरे प्यार की मिशाल बनना चाहता हूं मैं, प्यार, प्यार, प्यार बस प्यार हूं मैं ।।     ःःकल्याणसिंह चौहानःःः

तेरु भरोसु

 ।।ःः तेरू भरोसु ःः।।           ःःःःःःः प्यार छौं, तेरा प्यारौ भरोसू चांदु । रंग छौं, तेरा रंगा रंग रंगंण चांदु  ।। ख्याल छौं, तेरा ख्यालू रैण चांदू । सुपन्यु छौं, तेरा सुपन्यौ औण चांदु।। आधु छौं, त्वे दगड़ि पूरु होण चांदु। निराश छौं, तेरा होंठूं हैंसण चांदु।। लाटु छौं, तेरि वाणि लगण चांदु । खुशी छौं, तेरा मन मचलण चांदु।। खुश रंग छौं, तेरा हाथूं रचण चांदु। बोल छौं, तेरा मुखन बोलण चांदु ।। प्यार, प्यार, प्यार, बस तेरु प्यार छौं।। ःः कल्याण सिंह चौहान ःः      ःःःःःःःःःःःःः

कालु. गोरी

                ःःः कालु . गोरी ःःः                         ःःःःःःःः कल्याण--      तु छैं दाणि ग्यौं कि, मैं दाणि कोदै की।                    तु गोरि मैं कालु, हमरि कनकै निभणै की।। पुुुष्पा--          द्वी मिली ढबड़ि बणी जौला,                    द्वी रंग दुनिया का, काना कालु राधा गोरी,                    दिल मिलणै बात च,                     खूब जमलि हमरि जोड़ी।। कल्याण--.     त्व्वे कु बोलला उजुलू दिन,                      मैं कु कालि रात,                    बोलला दिन रात कनकै रैला साथ।। पुुुष्पा--      ...

भोलेनाथ

 ।।ःःःः भोलेनाथ ःःःः।।            ःःःःःःःः भोले तेरे चरणों मे, मैंने अपने को सौंप दिया है, प्रभु सौंप दिया है, तेरे चरणों मे....... भोले तेरे सिवाय न जग मे, कोई सहारा है, कोई सहारा है प्रभु चाहे ठुकरा दे तू,  या दे दे सहारा.. प्रभु देदे सहारा प्रभु तेरे चरणों मे, मैंने अपने को सौंप दिया है........ प्रभु सब तेरा दिया है, भोले सब तेरा है, ये दुनिया तेरी, प्रभु फूल पत्ते भी तेरे, जल तेरा, हवा तेरी, ये चराचर सब तेरा, भोले फिर क्या भेंट करू तुझको, मैंने अपने मैं को, तेरे चरणों भेंट किया है। प्रभु तेरे चरणों मे, मैंने अपने को सौंप दिया है........ भोले खबर नहीं अगले पल की। प्रभु अगले पल की, दुनिया भूल गई, तू सबका रखवाला, प्रभु सबका.... भोले फिर मैं क्यों भटकूं, किसी के पीछे, जब तू देने वाला.. प्रभु तेरे चरणों मे, मैंने अपने को सौंप दिया है........ भोले अनोखा प्यार देखा, प्रभु तेरे घर मे, तेरे घर मे.. सिंह, वृष, नीलकंठ, भुजंग, चुहा, सब रहते मिलजुल आपस मे, भोले तेरे घर मे, आपस में फिर किसी के प्यार को क्यों तरसूं, भोले तेरे होते, प्रभु... प्रभु तेरे च...

कुतरे पंख

 ःःःः कुतरे पंख ःःःः स्वच्छंद, आजाद पंछी मैं, फंस बैठा, सांसारिक मायामोह के जाल मे ।। फंसा इसमें जो कोई भी, कदम भर भी न हिल पाया जीवन भर।। यूं तो बहुत से जालों से, निकला व निकल सकता हूं मैं, बहुतों को उड़ा व उड़ा के ले सकता हूं मैं ।। बिन पिंजरे, बिन बेड़ी के भी, बहुत सीमित हो गया हूं मैं । देखे थे जो ख्वाब मैंने,  उनसे मीलों दूर हो गया हूं मैं । उडने क्या फुदकने से भी डरता हूं मैं, निकलने के डर से नये पंंख, मायावियों ने नोंचे नहीं, केवल कुतरे हैं मेरे पंख ।। ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःः

मैल

बहारी मैल धोऐं सब,  धोए न कोई मन को मैल ।। मन को मैल धुलन से, सारी दुनिया बंदे तेरे गैल ।। ःःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः

इंसानियत

कोई होली मिलन करत हैंं, कोई करत ईद मिलन । हो सुखी संसार करवाइये, इंसानियत से इंसानी मिलन।। ःःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः

सेवा

मुर्दों को पूज के, काहे व्यर्थ करें समय इन्सान। जिन्दौंं की सेवा कर देख, सुखी होए सारा संसार ।।                         ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः

शिक्षा

  बच्चों को ऐसी शिक्षा दीजिये, जो इन्सानी हो। पानी जिस वर्तन डारिए, जैसे पानी पानी होए ।। ःःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः

मेरे प्यार

 ःःःः मेरे प्यार ःःःः       ःःःःःःःः मेरे सिसकते आंसुओं की, बहती किताब में, कहीं न कहीं तुम, जरूर शामिल हो, लिखा न हो तुमनें. कोई अक्षर,  लेकिन दिल के दर्द की कलम, तुम्हीं हो । आंखों की दवात मे, आंसुओं की स्याही, तुम्हीं तो हो, मेरे प्यार ।। ःःःःकल्याण सिंह चौहानःःःःः

मेरी जीत

 ःःःः मेरी जीत ःःःः       ःःःःःःःः मैं गिर गिर के उठता रहा, उठ उठ के भी गिरता रहा, क्रम उठ-उठ के गिरने का, गिर गिर के उठने का, हर घड़ी, हर पल, हर क्षण, नित्य यूं ही चलता रहा। लेकिन चलता कब तक, आखिर किसीको तो जीतना था, और मैं जीत गया ।। ःःःःकल्याणसिंह चौहान "दिल"

वेबस

 ःःः बस मे वेबसःःःः        ःःःःःःःः मैं रोज,  जीवन का सफर, करता हूं, होशोहवास के साथ, बैठे खड़े होकर , बस मे, लेकिन वेबस होकर ।। ःःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः

साधक

 ःःःः साधकःःःः      ःःःःःःः एक तरफ दुनिया के उलाहने, दूसरी तरफ प्रिय के, कृकश बोल और तीखे नैनो की मार, सोचता हूं पहले, किसका साधक बनू ।। ःःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः

लड़ाई

 ःःलड़ाईःः   ःःःःः एक तरफ सशस्त्र दुश्मन, दूसरी तरफ अंतर्आत्मा, सोचता हूं, पहले किससे महाभारत लड़ू ।। ःःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः

बुलबुले

  ।।।।ःः बुलबुले ःः।।।।           ःःःःःःःःः बुलबुले पानी के, होते हैं छणिक, उठते हैं पल मे, हंसी खुशी से, विलीन हो जाते हैं पल मे।। कर जाते हैं, मोहित मन को, पल भर मे ।। गौर से देखो, जरा कभी, ध्यान मग्न हो के ।। कह जाते हैं वे कहानी, इस संसार की, कुछ ही छणों मे। दे जाते हैं उपदेश,  इस जग को।। बदी छोड़, कर नेकि बंदे, क्यों कि मृत्यु सत्य, जग मिथ्या ।। ःःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः

आशीर्वाद

 ःःआशीर्वादःः झुका ही था मैं लेने को, कि हटा दिए पांव, उन्होंने कहकर ये, काबिल नहीं तुम मेरे आशीर्वाद के ।।  ःःःःकल्याण सिंह चौहानःःःःः

पैबंद

 ःः पैबंद ःः पैबंद खोला ही था, जलवा सरेआम करने को, कि झुक गए सर सभी के, मूरत जो भगवान की थी ।।   ःःःःःःकल्याण सिंह चौहानःःःःः

मंत्र

 ःः मंत्रःः मां बाप समझ न पाऐ जिसे, उम्र भर, है कौन सा मंत्र, वह वसीकरण का, एक इशारे से चला देती है, बहू जिसे ।    ःःःःःःकल्याण सिंह चौहान ःःःःःः

दूरिया

 ःःदूरियांःः कितने पास हैं हम, कहने को एक दूसरे के, कि श्वांसे भी आपस मे टकराती हैं। फिर भी न जाने क्यों, रेल की पटरियों की तरह, ये दिल नहीं मिल पाते।। ःःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः

मील का पत्थर

 ःःःमील का पत्थरःःःःःः        ःःःःःःःःःःः दूर पास होने के मंजिल का, ज्ञान कराता है जो, पथिक को, यही हकीकत है उसकी, कुत्ते भी पेशाब कर जाते हैं, उस मील के पत्थर पर ।।   ःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः        ःःःःःःःःःःःःः

तुम - बिन

 ।।ःःःःतुम  बिन ःःःः।।                 ःःःःःःःःःःःःःःःःः कै का दुःखै, क्वी क्या जाणू, क्वी क्या जाणू। कै की पीड़ै, क्वी क्या जाणू, क्वी क्या जाणू। जै का खुटा बिंव्हांई, व्ही ही जाणू, व्ही ही जाणू।  कै का दुःखै.. रोणू धोणू सभी देखदा, रोणू धोणू, भितर चुभ्यू कांडू, क्वी नी देखदो, क्वी नी देखदू, बितदी जैई, व्ही ही जाणू।  कै का दुःखै की......... सब छोड़ी चली ग्यां, कै का सहारा। कै का सहारा। अपणी खैरी कै मा लगौंण, कै मा जी सुणौण। क्वी नी च अपणू, क्वी नी च।  कै का दुःखै कै.......।। बौड़ी बौड़ी याद आली, पुराणा दिन्यू की। पुराणा दिन्यू। दिलासू दिलौणू, क्वी नी दगड़।क्वी नी दगड़..। क्वी नी दगड़ आंशू पोछूणू। आंशू पोछूणू।  कै का दुःखै की.. तुम्हारा जाणौ दुःख, मै कू भारी।मै कू भारी। दुनिया मा बिछोह न होऊ, सौंजड़्या कै कू। सौंजड्या कै कू। सौंजड़्या जनू नी होण,  दुनिया मा सारी।दुनिया मा सारी। कै का. सौंजड़्यौ दगड़ी सभी, घौरू रेला। घौरू रेला। कन कै की रैण, एखूली एखूली। कन कै रैण अकेला कूड़ि, अकेली डिंडाली।  कै का दुःखै......।। मतलबी दुन...

पहाड़ याद करुणू

  ।ःःःःपहाड़ याद करुणूःःःः।।        ःःःःःःःःःःःः पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू, हिंवली डांडि कांठी, घाटा-बाटा, गौं-गुठियार, याद करणू ऐ जा प्रदेसी,  अपणा पहाड़.. पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू, झिझक बुबा की, मां कु लाड़-प्यार।  लोण रोठी, घ्यू कि गोंदगी। गुड़ै डौळी, याद करणी, ऐ जा प्रदेसी, अपणा पहाड़ ... पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू, भै बैणौं कू, मिलि बांटि खाणू। ठंड्यूं राती, ढिकाण खैंचुणू, मेरु भै भुल्ला, दीदि भुल्ली बोलुणू, याद करणू, ऐ जा प्रदेसी, अपणा पहाड़.. पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू, बुवे-बुबा, काका-काक्या,  बोडा-बोड्या खुटा सेवा सौंळी,  दाना सयणौं कु, चौंठी भुक्की पेणू, याद करणू, ऐ जाव प्रदेसी, अपणा पहाड़.. पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू, स्वालि-पकोड़ी, फांणु-थिचोंणी। खटइ-बाड़ि, माळुवा पत्तों फौड़ौ भात, याद करणू, ऐ जा प्रदेसी, अपणा पहाड़.. पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू, बाणु बुतुणू, मल्लि-मुल्ली, वल्ली-पल्ली सारी। कल्यौ खाणु, मोंडा बैठी,  याद करणू, ऐ जा, प्रदेसी, अपणा पहाड़... पहाड़ू का, रैवासी, प्र...

हिन्द की सेना

     ।।ःःःःहिन्द की सेना ःःःः।।         ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः गर्व है हमें अपने हिन्द,          हिन्द सेना के वीर सपूतों पर।       रात अंधियारे सुस्ता रहे थे जब,                      वीर जवान गलवान घाटी पर। चीनी कायरों ने धोखे से कर दिया वार,                                 भारत के जवानों पर। धीर अधीर न हुऐ, झट उठ खड़े हुए,                             चीनियों की छाती पर।। उन्नीस सौ बासठ का भारत नहीं अब,                                ऐ चीन ये तेरी भूल है।    एक वीर जसवंत नहीं अब,                    जसवंत के वंसजों की फौज है।। असफलता सरकारी थी,    ...

जाने वाले

  ।।ःःःःजाने वाले ःःःः।।        ःःःःःःःःःःःः किसी के जाने का दुःख क्या होता है, कोई क्या जाने। उन्हें पूछो, जिन्हें छोड़ चला गया अपना कहां न जाने।। दुनिया तो हे राम हे राम कहती है, शमशान पहुचने तक। घड़ी भर तसल्ली देंगे लोग, चिता की आग ठंडी होने तक।। वह जगह भर न सकेगी, जिसे छोड़ चला गया जाने वाला। उनकी बातें  यादें याद आऐगी, पर न आएगा जाने वाला।। कभी लगता है, वह सामने है हमारे,  हमसे बात करने को। सपना टूटता है जब, कुछ नही रहता है,  सिवाय रोने को।। भूल जाऐगी दुनिया, कुछ याद न रखेगी, समय बीतने पर। बस घड़ी भर को याद करेंगे,  कभी किसी को देखने पर।। कितने सपने बुने थे, कुछ तुमने, कुछ परिवार ने मिलकर। सब टूट गए तुम्हारे जाने पर, अब बुनेंगे सपने नये मिलकर।। क्या लेकर आऐ थे दुनिया में, क्या यहां से लेकर जाओगे। कहते हैं लोग अपने किए, अच्छे बुरे कर्म लेकर जाओगे।। ऐ इंसान कुछ ऐसा करके जा कि, दुनिया भूल न पाऐ तुम्हें। हो जहां भी भलाई कि बातें, लोग याद करें सबसे पहले तुम्हें।।          ःःःःकल्याण सिंह चौहान ःःःः       ...

भै- बैणौ प्यार

 ःःःःःःःः भै बैणौ... प्यार ःःःःः।            ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः                                                                                                        भै बैणौ कु प्यार भैजी, मां बाबुई देण।                               भौं कुछ बदली जालू भैजी, अपणू खून नी बदलेण।।  भै बैणौ कु प्यार भैजी, एक ही जनू होंदू।।                            न कैकू प्यार ज्यादा भैजी, न कैकू होंदु कम।। भ्यार मिली जालू भैजी, सब कुछ भ्यार।                      ...

मेरू भुल्ला

 ।।।...ःःःःमेरू भुल्लाःःःः...।।।                             ःःःःःःःःः                      कैन देखी होलू, मेरू भूल्ला, देखेणू नी च।                कुछ बोली नी गेई, कुछ  बतैैई नी च।।  कैन देखी होलू... खोज्याणू छौौं वेई, उल्या पल्या भीतर।                       कखी नी दिखेणू, कख गैई होलू।   कैन देखी होलू.......        गौं का भै बैंंणौं कैन, मेरु भूल्ला देखी।।                           कैकी दगड़ होलू, कैका होलू घौर।।    कैन देखी होलू......  बिना खैंयां, पियां, कख गै होलू।                          भुखू प्यासू कख होलू, जरा नी डौर।।  कैन देखी होलू.... .. अपणौ मा क्या...

नौना- बुवारी

              ।।।।....नौना..बुवारी....।।।।                              ःःःःःःःःःःः                                                                                        नौनु बोल्दु , मेरि बुवारी मेरि जिन्दगी।                          पालि पोसि ब्बे बबुन, ह्वेगेन घौरै गंदगी।                            किलै बोन ब्बे बबूई , बिगड़ी च बुवारी।                         कैकु बिगड़्यू नौनु अपणु, कै दोष देण।।               ...

सुमन

                    ।।। ......सुमन.....।।।।               ।।ःःःःःःःःःःःःःःःःःः।।                                                                                                                    सुमन, मेरा मन हो जाए।             भटकन, अटकन, सिरकन,                              व्यर्थ धड़कन थम जाए,                                                  मेरा संसार ही घर हो जाए।। ...

पैलु मिलन

                ।।....पैलू मिलणू....।।।                                     ःःःःःःः ःःःःः                                                                                                            तेरि स्वाणि मुखड़यू रंगरूप देखी।।                                          जुकुड़ी धकध्याट, रंगबिरंगा भाव उमड़ी,                        कुतगलि लगै, हंसै रुलै, मेरा मन प्रेम जोग जगिगे।।        .    ...

क्या छौं, कु छौं

      ःःः क्या छौं, कु छौं ःःःः कै कु किलै बोलु मैं, अफी सै परेशान छ मैं।।                      रिस्ता खूनौ जौं से मेरु, ऊंही से ल्वेसार छ मैं।।              ऐ बथौं कभी इन भी चल, पता चलु कैकु छौं मैं। ज्यूणुं तकौ दुंद, निभौणू म्वन तकौ वक्त देगी मैं।।                                                                              बोल्दिन खुशी ह्वे ज्यूण,  खुश मुखड़ि बण्यू छ मैं।                खड़गदार मनखी निभौंदन रिस्ता, पता छ मैं।।        कै कु किलै बोलु मैं, अफी सै परेशान छ मैं।                      रिस्ता खूनौ जौं से मेरु, ऊंही से ल्वेसार छ मैं।।      ...

माया

         ।।.......माया......।।।।                     ःःःःः                       माया माया बोल्दिन सभी, कनी माया ह्वे।                    मेरी माया तेरी माया, कै कि जी माया ह्वे।।             माया कू मुण्डरो कै, कै माया को बुखार ह्वे।                       माया कू ढंगचोल कै, कै माया को खुमार ह्वे।।            जवनी कि माया कै, कै रंगरूप माया ह्वे। आंखि मायादार कै की,  कै मनै माया ह्वे।।          माया माया बोल्दिन सभी, कनी माया ह्वे।                      मेरी माया तेरी माया, कै कि जी माया ह्वे।।               मेरी माया सच्ची तेरी माया झूठी, सभी बो...

सनातनी- नववर्ष

 ।। .ःः  सनातनी- नव वर्ष.. .ःः।।।                ःःःःःःःःःःःःःः                            चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, सनातनी नववर्ष आरम्भ। दया धर्म प्रेम विश्वास, इसके स्थिर चार स्तम्भ।। आगन्तू स्वागत की,  अनोखी सनातनी रीत। प्रथम नौ दिन नवरात्रि, भजन कीर्तन संगीत।। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, सनातनी नववर्ष आरम्भ। दया धर्म प्रेम विश्वास, इसके स्थिर चार स्तम्भ।।     ढोल तासे शहनाई बजे, बजे शंख मृदंग। चौदिशि उत्सव मने, हर मन छाई नई उमंग।। सुहावना मौसम हुआ, ठण्ड ज्यादा न घाम। नवे नवरात्रि रामनवमी, प्रकटे प्रभु श्रीराम।। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, सनातनी नववर्ष आरम्भ।        दया धर्म प्रेम विश्वास, इसके स्थिर चार स्तम्भ।।            झूमती फसलें, इठलाते फूल, महकता वातावरण। ऋतुराज बसतं यौवन पर, धरती बनी नई दुल्हन।। फूलों संग भौंरे ठिठोली करें, खुशी बौराये आम। राममयी नववर्ष का,  हृदय से स्वागतम स्वागतम।।  चै...

दिवाली

     ःःःः  दिवाली  ःःःः           जगमग रौशन, दिवाली के दियों की रौशनी।   कीर्ति पताका आपकी, जग लहराये हरदम।। फुलझड़ियां हों , खुशियों की लड़ियां। फुस होें, जीवन के सारे दुःखदर्द गम।। यश फैले आपका, मिले मान सम्मान। भंडारे भरें हों, कभी खुशी न हों कम।। जगमग रौशन, दिवाली के दियों की रौशनी।  कीर्ति पताका आपकी, जग लहराये हरदम।। दुःखों भरी अमावस्या, क्षण में छंट जाय। मिले स्वच्छ चांदनी सी, प्यार की सौगात।। वैमनस्य पास न आये, हो जग  कल्याण। जग हो नाम आपका, वजनी हो हर बात।। जगमग रौशन, दिवाली के दियों की रौशनी।  कीर्ति पताका आपकी, जग लहराये हरदम।। दिया शरीर, गम तेल, दुःख होेंऐं बाती। बचपन के से दिन, सुहाग की सी रातें।। पितृ हस्त सर हो, संस्कारी हो परिवार। बंधु बांधव एकजुट हों, घर राम दरबार।। जगमग रौशन, दिवाली के दियों की रौशनी।  कीर्ति पताका आपकी, जग लहराये हरदम।।        ।ःःकल्याणसिंह चैहान "दिल"::::          

देव भूमि-. उत्तराखंड

        ।ःःः  ’’देव भूमि- उत्तराखण्ड’’ ःःःः।।                   ःःःःःःःःःःःःः देव भूमी, प्यारी भूमी, खण्ड उत्तरा स्वर्ग भूमी। जन्म भूमी, त्वेकु दण्डवत प्रणाम, मेरी भूमी।। शिव कु कैलाश यख, मठू मा मठ केदार। हिम राज हिमाल खड़ू, स्वर्ग जाणौ बाटू।।                         लक्ष्मी नारायण बद्री, नर नारायण साक्षात। जोग्यों का तप, सजदू अक्षरियों कु साज।।  देव भूमी, प्यारी भूमी, खण्ड उत्तरा स्वर्ग भूमी।  जन्म भूमी, त्वेकु दण्डवत प्रणाम, मेरी भूमी।।        पंच केदार, पंच बदरी, पंच प्रयागै थाती।                       मोक्षदायनी गगां, सजी फूलों की घाटी।।                        पार्वती कू मैत, शिवजी कू होलु सौरास।  हिंवली डांडी कांठि, जड़ि बूटि च खास।।  देव भूमी, प्यारी भूमी, खण्ड उत्तरा स्वर्ग भूम...

खट्टी- मिठ्ठी

         ।ःःःःखटी-मिठ्ठी ःःःः।।                 ःःःःःःःः  धोखा दे जांदू, मां जायूं, पीठयू भै,  साथ दे जांदु दुःख मा, प्यार जायूं दोस्त,  रस्ता ही बडू लम्बू, एक मन से है का मन जाणौ कूू।।  कै मा नि लगौण छुंई, अपणा बुरा वक्त की, द्वार पटेल्या भी उठे ली जदन,  लोग उजड़यां कूड़ों का।।  खट्टू, मिठ्ठू, कड़ू, तीखु, लोण्या,  हर चीज कु अपणू अपणू स्वाद च,  अफु बोला त मिठ्ठू, हैकु बोलु त कड़ु,  झूठ का ही, द्वी स्वाद होंदा।।  पिंजरोे मा होयां बंद पशु पक्षीयू,  देखणु जंदन सब चिड़िया घर,  पर क्वी नि दिखदू जानवर, अपणा भीतर कू।। गजब जमनू, बणै कि रावण अफु, जलौदं हर साल, होंदु अच्छू, मिली रावण जलौंदा सभी, अपणा भीतर का अहंकार कु।।               ःःः कल्याणसिंह चैहानःःः                      ःःःःःःःःःःःःः

औकात

         ।ःःःः औकात ःःःः।।              ःःःःःःः  चिफली गिचिन, झूठ बोलणू नी आयो हम,  खरखरु बोली, कथगा आंंख्यूं खटगणा छा हम।।  चिफलैस मा फिसलणै डौर, आज भी भोल भी,  नाकुणै सी कणांक बोली, बुरा त भला भी हम ।।  मानि कि लोखू जनू, भौं कुछ नि कमै हमन,  खुश छौं, ठोकर खै खै उठ्यों, सीदा बोटों भी गिरौं।।  अपणी खुशियों कु, क्वी कभी नि गिरै हमन,।  जैं पुरै नि सकदां,  वीं बात नि कर दा हम।। अपणी औकात पता च, औकात मा ही रेैंदा हम,।  न कैसै ज्यादा चांदा, न अपणी मेहनत से कम।।  तमन्ना त कुछ विशेेष करने रख दां हम भी।  क्वी हमरा खुटौं दब्बू, इन तरक्की नी चांदा हम।। बुलदियों पर पौछण, क्वी बड़ी बात नीच,  सच्चाई च, जमीना सिवा क्वी जगह नी बैठणू।।  अपणी बोली बात याद रखणै, आदत नी मेरी,  रखु भी किलै, पता च मैं, सच सच च, बदलदू नी।।     ।।ःःःकल्याणसिंह चैहानःःःः।।

प्यार

             ।।ःःःःप्यारःःःः।।                 ःःःःःःःःःः        हक न शक,  तेरू न मेरू,        लेण की न, केवल देणै बात,        भीतर, भ्यार बस एक ही गुदगुदी,        अपनापन कु एहसास,        यू ही सच्चू प्यार च।।                जाण न पैचाण, हो न हुजत,                एक होणै, जल्दी जिद,                लेण देणै हर वक्त बात,                यु प्यारा नौ धोखा च।।          आदम्यू , कै औरत से,          सच्चा प्यारौ बादु, हर कसम,          प्यारा नौ, केवल छल च,          इरादू  केवल, अंगसंग च।।                   य...

वक्त अर जमनु

  ।।ःःःवक्त अर जमनु ःःः।।        ःःःःःःःःःःःः वक्त अर जमना कि बात च, बाकी कै कि क्या औकात च।। वे वक्त, चट रोटि, पट दाल,  खाई रोटि, मारि फाल,  एकलसी का तीन काल,  कुटनी,पिसणि, पाणि सार।। अबै वक्त, उठण कपाल घाम,  खंतड़ों मा चा कु डाम, पेस्ट, फेसियल, नेट श्रेष्ठ,  खान्दु पेन्दु मुन्या हाल।।                      वक्त अर जमना कि बात च, बाकी कै कि क्या औकात च।। वे वक्त , कुग्रार बुद्धि,  अंठोसदार, झुकी आंखि,  भग्यनु कू भग्यान,  चलकै निंद, स्कूल्या ध्यान।। अबै वक्त, उल्टु इलम,  फिल्म, चिलम, नेट, दारू नीट,  सब दगड़ चीट, दिमाग रीतु कु रीत,  एक पीट हैकु पीट।।                       वक्त अर जमना कि बात च,  बाकी कै कि क्या औकात च।।  वे वक्त, की बात च,    दर्जी की दगड़ स्यूण,  जनन दगड़ दथडु फंकुलु,   बामण दगड़ बल पतडु।।  अबै वक, जनन मू शीशा क्रीम पौडर,  दर्जी गैन हर...

अपणा- बिरणा

                   ःःःःअपणा-बिरणाःःःः।।                 ःःःःःःःःःःःःःःःः   ठेसण्या बोली छोड़ी, प्यारा बोला दुई बोल।  लाखै चीज मिलदी, प्यार मा माटा सी मोल।।              बिरणा, अपछणा, बटोयूं अगनै रोणू नीच।  बुकरा-बुकरी रूै, माया अपणी खोण नीच।  छुयांल मुण्ड मलासी, झूटू दिलासु दिखाला।  पीठ पिछनै हंसी मजाक, खूब ठठ्ठा लगाला।           ठेसण्या बोली छोड़ी, प्यारा बोला दुई बोल।  लाखै चीज मिलदी, प्यार मा माटा सी मोल।।                भीतरै बात, अपणा भीतर रैजाउ त सोने च।  खुसर-फुसर बात फैली त, लंका फुकेणी च।  बोलदन जू बिदे गेन, बिदेकी मोती बणी गैनी।  दूधै उमाल, सर उमली जग्यू चुलु बुझे गैनी।।  ठेसण्या बोली छोड़ी, प्यारा बोला दुई बोल।  लाखै चीज मिलदी, प्यार मा माटा सी मोल।।              होण बाण्या भयू कि तिबरि, राम दर...

फकीर

                                  ।ःःःःःफकीरःःःःः।।।                     ःःःःःःःःःःःःःःः                    अपना कुछ नही, सब कुछ खोकर भी। उसे पाकर, कुछ नही, बहुत कुछ पा गया हॅू मैं।। अपना कुछ नही, सब दाव हार कर भी। उससे हारकर , बहुत कुछ जीत गया हॅू मैं।।                  अपने से नही, अपनो से भी बहुत दूर होकर। उसके करीब नहीं, बहुत करीब आ गया हॅू मैं।। अपने गुनाहों-पुण्यों का, क्या हिसाब दूॅू। उसके दीदार से, इन सबसे पार पा गया हूॅ मैं।।                  अपने जीवन के पलपल का, क्या हिसाब दूॅ। उसके प्यार के पल में, एक जीवन जी गया हॅू मैं।। अपने सामने सब कुछ है, पर कुछ दिखता नहीं। उसकी सांवली सूरत, अपनी आंखों बसा गया हूॅ मैं।।           ।।ःःःःकल्याणसिंह चैहानःःःः।।

प्रदेशी

           ।ःःःःःःःप्रदेशी ःःःःःःः।।                    ःःःःःःःःःःःः  कख  छौं, कनु छौं, अपणू घर छोड़ि,  प्रदेश  मा मैं आज ।।  हे सात पुस्तों का पित्रों  छौंदा ब्बे-बाबू, बोडा-बोडी,  चै-चचों, भै-भौजूं, भै-भूल्लों,  दीदि-भुल्यू, भतिजा-भतिजों, अकेलु हवेग्यों । भरपूर परिवार छोडी, प्रदेश मा मैं आज ।।  हे गौं का पंचनाम देवतों,  छौंदा कुड़ि-पुंगड़ी, डिंडली-तिवरी,  पांडा-ओबरों, हाट-चौक',  द्वार-मोरियू, भ्यांंरा पठबोड़ों होंदु,   कुकरेठा गोड़े ग्यों, प्रदेश  मा मैं आज ।।  हे भूमि का भुम्याल देवता,  छौंदा मुंरेडी- सगोड़ी पतोड़ी,  गद्गदी- डंगलड़ी पुङ्ग्ड्यू,  सटेड़ि-कोदड़ी पुङ्ग्ड्यू,  अकेलू ऐकांत बैठन्णू भी,  तरिसिग्यों, प्रदेश  मा मैं आज ।।  हे हिमाल, हे पंच प्रयाग,  छौंदा धारा-पंदेरों, नौ-खल्यू,  छोया मंगरों, गाड़-गदनों,  कूल-नैरू, डिग्गि-हौद्यू  अकेलू पेना पानी बूंदूं भी,  तरिसिग्यों, प्र...

वक्त

             ।ःःःःःःःवक्तःःःःःःः।।                         ःःःःःःःःः    वक्त-वक्त पर, वक्त-वक्तै बात याद ऐजांदिन।  कै वक्त हंसैं जांदी बात, कै वक्त रुलै जांदिन।  कै वक्त समलौण, कुतगई देकि गुदगुदै जांदिन।  कै वक्त बात चमड़ताल मारी,बबरै-उठै जांदिन।  वक्त-वक्त पर, वक्त-वक्तै बात याद ऐजांदिन  ।।    ब्वै-बाबू का वक्तै,हमरी भी क्युई बात छई।  हम भी कै का, राजदुलारा से कम नी छाई।   वक्तै बात, एक वक्त अपनू इन भी आयो।  कोल्हू/भुर्त्या बल्द सी दिनरात जुत्या छाई।  वक्त-वक्त पर वक्त-वक्तै बात याद ऐजांदिन।।    बोलदन वक्त पड़ण पर ही अपना पछनेदिन।  वक्त बुरु त गुढ़यरा गोरु भी लत्ये सिंगे जांदिन।  वक्तै बात च मां जायां टगड़ी खैंची लमडैदिदन।  कभी प्यार जाया हाथ पकड़ी दगड़ा चल दिदन।   वक्त-वक्त पर वक्त-वक्तै बात याद  ऐजांदिन।।    गुस्सा मा लोग गधा/ उल्लू का पठ्ठा बोदन।  प्यार मा शेर का बच्चा बोली शाब...

प्यारै बात

            ।ःःःप्यारै बात:::::::।               ःःःःःःःःःः  न तिन कूछ बोली, न मिन कुछ सूणी,  न मिन कुछ बोली, न तिन कूछ सूणि,          फिर लोखू मां यह खुशफुस्याट क्यांकू।।  न कुछ बिमरी मैंमा, न कुछ बिमरी त्वेमा,  न बोझभारू मैंमा, न उधरी उकाल त्वेमा,,         फिर जुकड़ी मां यह धकध्याट क्यांकू।।  न खाणपेंण की, न पढ़ण लेखना की शुदबुद,  न लाटु  कालु मैं, न लाटिकाली सुनपटया तू,              फिर एकली सी सुनपटया रटण क्यांकु।।                ःःःः  कल्याणसिंह चैहानःःः

नौ वर्ष गढ़वाली

         ।ःः। नौ वर्ष (गढ़वाली)ःः।।। फुलेरि ऋतु बसंत, ज्यूंदै जोन, आकाश गैणां। सनातनी नौ वर्ष शुरू, पैल्या नौंर्ता चैत मैना।।  र्नौतौं नौ दिन, द्वौ देवतों की पाठ पूजा।          व्रत शुध्द तनमन, चसू ज्यादा न घाम।।  ठोल दमौ बजदु, बजदु शंख मृदंग घांड।  नवां नौर्ता रामनवमी, प्रकटे प्रभु श्रीराम।।  फुलेरि ऋतु बसंत, ज्यूंदै जोन, आकाश गैणां।  सनातनी नौ वर्ष शुरू, पैल्या नौंर्ता चैत मैना।।        चैत घुघूती घुरैली, खुद लगलि खुदेड़ मैना।    ‌  चैत नौबत बजलि, लगला थड़ियां गीत।          चखुलों का घोलू , नया जीवनै चुंइच्याट।          चैत मैना घरु मंदिरू देळी, फूलदेई रीत।।       फुलेरि ऋतु बसंत, ज्यूंदै जोन, आकाश गैंणां।   सनातनी नौ वर्ष शुरू, पैल्या नौंर्ता चैत मैना।।           रंग बिरंगा फूलून, डांडी कांठि ईठलौणी होली।            सतरं...

मात-पिता की सेवा

।ःःःःमात-पिता की सेवा ःःःः।।           ःःःःःःःःःःः मात पिता की सेवा से बढ़कर, न कोई पुण्य काम। कहती है दुनिया, मात पिता के चरणों चारों धाम।। दुनिया में मातृ पित्र भक्त, प्रसिद्ध हुए श्रवण कुमार। कन्धे बैठा अंन्धे मात पिता को, ले गए तीर्थ स्थान।। मां गीले बिस्तर सोई, पिता ने पसीने से तर किया काम। मात पिता का ऋण न उतरे, उतर जाए सब अभिमान।। बन गमन कर गए, मात पिता की आज्ञा का रख मान। तीनों लोकों आज्ञाकारी पुत्र, प्रसिद्ध भगवान श्री राम।। मां सुबह की सुहावनी धूप है, पिता दिन के तेज घाम। मात पिता का आशीष लेकर, कठिन नही कोई काम।। चरण बंदना मात पिता की, करा परिक्रमा का विधान। तीनों लोकों प्रथम पूज्य बने, गौरीसुत गणेश भगवान।। मात पिता को धोखा देकर, याद रखो समय बलवान। जिनसे इतना लाड़ तुम्हें, देंंगे तुम्हें भी वे वही सम्मान।। अधर मे लटके पित्रों को, तरपन देकर मुक्ति दिलाई। पित्र ऋण चुका के,  प्रसिद्ध ऋषि जरत्कारु महान।। मात पिता की सेवा से बढ़कर, न कोई पुण्य काम। कहती है दुनिया, मात पिता के चरणों चारों धाम।।      ःःःःःःकल्याण सिंह चौहान "दिल" ःः...

पुष्पा मेरू मन

  ।ःःःःःःपुष्पा मेरू मनःःःःः।।।     ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः त्वे मा लगीगे पुष्पा, मेरू मन ।  कनकै बतौऊ पुष्पा ,मेरू मन। कनकै त्वे मिलू पुष्पा, मेरू मन।  त्वे से,त्वे पै, त्वे मा पुष्पा, मेरू मन। त्वे मा लगीगे.... तेरा सुपन्यों पुष्पा,  मेरू मन।  कभी हंसौंदा पुष्पा, मेरू मन।  कभी रुलौंदा पुष्पा, मेरू मन। कभी सागर सी गहराइयूं पुष्पा, मेरू मन। त्वे मा लगीगे.. तेरी रत्न्यालई आंख्यूं पुष्पा, मेरू मन। तेरू मुलमुल हैंसूणौं पुष्पा, मेरू मन। तेरू मठुमठु हिटणू पुष्पा, मेरू मन। तेरि प्यारी सुरत बसिगे पुष्पा ,मेरू मन। त्वे मा लगीगे.... तेरा औंण जांणा बाटों पुष्पा, मेरू मन। औंदू जांदू त्वे देखूणो पुष्पा, मेरू मन। तेरि मिठ्ठी बोली सुणणौ पुष्पा, मेरू मन। कुछ तेरी सुणणौ, कुछ अपणी सुणणौ पुष्पा, मेरू मन। त्वे.. दिन त्वे मिलणै आश पुष्पा, मेरा मन। त्वे बगैर रात नी कटदी पुष्पा, मेरा मन। त्वे पौण खोण की उलझन पुष्पा, मेरा मन। तु हर श्वांस, हर आश बसिगे पुष्पा, मेरा मन। त्वे मा लगीगे.... त्वे मा लगीगे पुष्पा, मेरू मन। त्वे मा.....।.           ...

होली है

                      ।ःःःः होली है ःःःः।।                    ःःःःःःःःःःःः ऐगी होली फागै की, भाईचारा प्यार की। छोली जाली मठ्ठा बल, छोली जाली मठ्ठा। पंचैती चौक, होली खेलणू, सरू गौं कठ्ठा।  ऐगी होली फागै की, भाईचारा प्यार की।।  होली है स रा रा होली रंग उडा, उडा अबीर गुलाल। सयणों का खुटों, अयणौं मुख रंग लगा, न रौ क्वी मलाल।। ऐगी होली फागै की, भाईचारा प्यार------- ढोल बजा, दमौ बजा, बजा बाजू मसक। हंसदू खेलदू बौ, स्याली गलोड़्यू रंग लगा,  न रौ क्वी कसक। ऐगी होली फागै की, भाईचारा प्यार की। बुरा न मानो.... बनिबन्या रंग मीली, ह्वे गी एक रंग। रंगू मां रंग भगी, प्यारौ कू रंग। क्वी घोटा भंग। ऐगी होली फागै की, भाईचारा प्यार की। बुरा न मानो.--      ःःःःःःकल्याण सिंह चौहान"दिल" ःःःःःः                  ःःःःःःःःःःःःःः

होली मिलन

  ।।ःःहोली. मिलनःः।।         ःःःःःःःःः होळी का बाना, तेरा औणै खुशी, मन मेरू रंगमतू बण्यूं च। घाटा बाटों, फ्योलि बुरांश, अबीर-गुलाल धरै, सरु गौं सज्जयूं च।  होळी का बाना------ ऐ अपणा सी, सब कुछ भूलिभाली, खुश मन ऐ। निमन ह्वे आंखी, टकटकी लगै, तेरा बाटा लगी च।। कै रंग लगैली, कै छोड़ली, त्वे पै छोड्यू च। कनकै लगैली रंग, सरू गौंउ कठ्ठा होयूं च। कब ऐली, वक्त नि कटणू, जिकुड़ि मेरी धकध्याट। जब तू दिखेली, चैन पोड़ौलू, मेरा दिला अकत्याट।। होळी का बाना, तेरा औणै------ आंख्यूं ही आंख्यूं, तन मन रंगलू, प्यार कू रंग। सभी रंगू मा, पक्कू अर सच्चू रंग, प्यार कू रंग।। होळी का बाना, तेरा औणै खुशी, मन मेरू रंगमतू बण्यूं च।।           ःःःकल्याण सिंह चौहान "दिल"::::                       ःःःःःःःःःःःः

तेरू प्यार पुष्पा

  ।ःःःःःःतेरू प्यार पुष्पा ःःःःःः।।             ःःःःःःःःःःःः तेरू प्यार पैकी पुष्पा, तेरू प्यार। तेरू प्यार पैकी पुष्पा, तेरू प्यार। मेरा जीवन ऐगी मौल्यार।। ओणिकोणि खिलिगेन, ओणिकोणी। चौदिशी छैगी बसंत बहार, चौदिशी छैगी। तेरू प्यार पैकी पुष्पा, तेरू प्यार।। तीसा मनै तीस बुझिगे पुष्पा, तीसा मनै तपदा बदन सौण बरिसिगे, सौण बरिसिगे। मेरा मन बगदी प्यारै नयार।। तेरू प्यार पैकी पुष्पा, तेरू प्यार।। तेरा प्यार डूबी ग्यों पुष्पा, तेरा प्यार। सूखा मन फैली प्यारै बयार।। तेरा हाथ, डुबो चाहे लगौ पार। तेरू प्यार पैकी पुष्पा, तेरू प्यार।। तेरी सूरत बसिगे मेरा मन पुष्पा, मेरा मन बुझयां मन प्यारै ज्योत जगीगे। सुना मन प्यारै घंटी बजीगे। तेरू प्यार पैकी पुष्पा, तेरू प्यार।। तिन चैही नीच पुष्पा तिन चैही। हम एक ह्वे ही जांवां।हम एक तेरा आंसू मेरि आंख्यूं औंदा तेरू प्यार पैकी पुष्पा, तेरू प्यार।। तू ठैरी नौ कू पाणी पुष्पा, नौ कू पाणी गाड गदनू होंदी, दूर चली जांदा। अपणी दुनिया बसौंदा तेरू प्यार पैकी पुष्पा, तेरू प्यार।।         ःःःःःःकल्याण सिंह चौहान ः...

सुमन त्वे मिलणू

  ।ःःःःसुमन त्वे मिलणू ःःःः।            ःःःःःःःःःः त्वे मिलणू मेरू मन सुमन, त्वे मिलणू, कनकै मिलू, कख जी मीलू, दुनिया की लाज सुमन, दुनिया की लाज, त्वे मिलणे मेरू मन सुमन, त्वे मिलणू।। तेरा प्यार सुमन, तेरा प्यार, न खाणै चिंता सुमन, न स्यौणै फिकर, सुदबिजू सी ह्वेग्यौं, तेरा बगैर, त्वे मिलणू मेरू मन सुमन, त्वे मिलणू।। तेरा सुपन्यौं ख्वैग्यौं सुमन, तेरा सुपन्यौं, कभी हैंसौंदा, कभी रुलौंदा, कभी कुतगली दे चुप ह्वे जांदा, त्वे मिलणू मेरू मन सुमन, त्वे मिलणू।। तेरी रत्न्याली आंखी, सुमन, तेरी रत्न्याली, कभी झुकी जांदी, कभी मीली जांदी, तेरी आंख्यूं न लूट्याली मेरू मन  त्वे मिलणू मेरू मन सुमन, त्वे मिलणू।। नजर लगी रैंदी सुमन तेरा बाटा, तेरू मठुमठु हिटूणू, मठुमठु मुलमुल हैंसूणौं, मुलमुल हैंसूणौं, त्वे मिलणू मेरू मन सुमन, त्वे मिलणू।।       ।ःःःःकल्याण सिंह चौहान ःःःः।।                 ःःःःःःःःःःःःःः

मजबूरी होलि क्वी

  ।ःःःःमजबूरी होली क्वी ःःःः।। कखी बाटा, भेंट होली, रुकी ना सकी त, खित हैंसी देई, मैं समझी जौलू, मजबूरी होली क्वीई।। दिलै बात, बतौण चैली, बतै ना सकी त, आंख्यूं  सनकै जैई, मैं समझी जौलू, मजबूरी होली क्वीई।। दगड़ी होला हम, छुंई बात न होऊ, कुछ वक्त, दगड़ी, बितै देई, मैं समझी जौलू, मजबूरी होली क्वीई।। अपणी खुशी, नी बतैली त, क्वी बात नीच, अपणू दुःख देई जैई, मैं समझी जौलू, मजबूरी होली क्वीई।। हम दूर ह्वेई जौला, मिलणू नी होऊ, घुटघुट बडूली लगैली, याद करी लेई, मैं समझी जौलू, मजबूरी होली क्वीई।। मैं भूली जैली, पछाणी नि साकी, पुराणा दिनू, याद करी लेई, मैं समझी जौलू, मजबूरी होली क्वीई।।  सच्चू प्यार पूजा च, क्वी सौदा नीच, एक नी होयां हम, प्रभु इच्छा होली, मैं समझी जौलू, मजबूरी होली क्वीई।।            ःःःःःःकल्याण सिंह चौहान ःःःःःः                        ःःःःःःःःःःःःःः

नौ तेरू

  ।।ःःःः नौ तेरू ःःःः।।। देखि ज्वा तेरी, स्वांणी मुखड़ी,  मैं अपणी , शुदबुद ख्वै ग्यौं।। मिली ज्वा त्वै से, नजर मेरी,  मैं आंखी झपझौण, भूली ग्यौं।। याद मा तेरी,मैं दुनियादारी भूली ग्यौं।। मिलण का छणू मा तेरा, मैं अफी तैं भूली, जड़ ह्वे ग्यौं।। औणै आहट से तेरी,  मैं सब भूली, त्वे मा रम ग्यौं।। ऐ, हवा ज्वा, तेरा तरफै,  मैं श्वास लेणू, भूली ग्यौं।। तेरा प्यार मा, ज्यीणू,  मैं ज्यीणू, भूली ग्यौं। प्यार एक तीस, बुझै नि बुझदी, मैं प्यारे तीस, पे की हारी ग्यौं।        ःःःः कल्याण सिंह चौहान "दिल"               ःःःःःःःःःःःः

बेटी

           ।ःःःःबेटी ःःः।।                  ःःःःःः देवतों से उत्पन्न, दुनिये उत्पत्ति बेटी, देवतौं स्वरूप, धरती आईं बेटी।। झूठ पराई, बेटी मैत सैसुरौ । सच, संसरि रिस्ता, निभौणे पराकाष्ठा बेटी।। ब्बे बब्बू बेटी, नौण घी कि कमौली, घौर मंदिर, बणौणै दिया बत्ती बेटी।। ब्बे बबुवा दिलै किताबै, सच्ची राजदार बेटी, ब्बे बबुई दारु दवैई, हदै मयली च बेटी।। ब्बे कि सहेलि, सच्ची मददगार च बेटी, बुब्बै हिम्मत, मेहनतै उत्साह च बेटी।। असली गुरु ब्वै बब्बी, पैरोकार च बेटी, झगड़ा ब्बे बबुवा, सुलझौणै जज च बेटी।। ब्बे बबुवा संस्कारौं कि, पहचान च बेटी, भग्यनू प्रभुई देईं, सच्ची सौगात च बेटी।। ःःःःकल्याण सिंह चौहान "दिल" ःःःः               

चौंफला कल्याण

        ।ःःःः चौंफला-कल्याण  ःःःः।।               ःःःःःःःःःःःः बोलि.बोली नि होंदू, प्यार कल्याण, ..बोलि.बोली... ह्वे जांदू, पैली नजर कल्याण,... ह्वे जांदू पैली नजर.. दूर रै, कम नि होंदू, प्यार कल्याण, ...दूर रै.... दिल रैंदू, दिला पास कल्याण, ..दिल रैंदू, दिल.... छुपै नि छुपदो,प्यार कल्याण, ..छुपै नी छुपदो... ह्वेगेन आंखी जब, चार कल्याण,.. ह्वे गेन आंखि.. औंदू नौ, जख तेरू कल्याण, .....औंदू नौ जख.... मेरि जिकुड़ी, धकदयाट कल्याण, ....मेरि जिकुड़ी... मिलदि बाटा, जब तु कल्याण, .....मिलदि बाटा.... मेरि खुटी, रगब्याट कल्याण, ....मेरि खुटी..... समणि औंदि, जब तु कल्याण,.... समणि औंदी... मेरि आंखि, झुकी जांदि कल्याण, ....मेरि आंखि... अपणा दिलै, मिन बोल्यालि कल्याण,.... अपणा दिलै... तेरा दिलै, तू जाणि कल्याण,.... तेरा दिलै..... सच्चू प्यार, पैली नजर कल्याण,.... सच्चू प्यार... बाकी शरीरौ, लोभ कल्याण, .....बाकी शरीरौ.... प्यार भूखू, बाग कल्याण,...... प्यार भूखू.... रखदु नजर, अपणा शिकार कल्याण,.... रखदु नजर...        ...

प्यार बंधन नी

          ।ःःःः प्यार बंधन नीःःःः।।                   ःःःःःःःःःः हां से तेरी, ना छै अच्छी, मन मंदिर मा अपणा, त्वे सज्जै बैठ्यौं मी।। औण से तेरा, नि औण छौ अच्छू, किस्मत अपणी, दौं लगै बैठ्यौं मी।। बाटा तेरा हेरण से, न हेरण छौ अच्छू, दिला झरोखा अपणा, सज्जै बैठ्यौं मी।। आंख्यूं से तेरि आंखी, नि मिलण छै अच्छी, कली दिलै अपणा, खिलै बैठ्यौं मी।। दगड़ से तेरा, मैं अकेलू छौ अच्छू, होश दिला अपणा, गंवै बैठ्यौं मी।। प्यार प्यास च, क्वी बंधन नी च, क्वी करी निभौंदू, क्वी निभैकि करदू।।          ।।ःःःःकल्याण सिंह चौहान ःःःः।।                    ःःःःःःःःःःःःःः

मां

          ।।ःः मां ःः।।             ःःःःःः मांं पहला स्पर्श, पहली गुरु, पहली भगवान, मांस पिण्ड संजोकर, मां ने डाली उसमें जान, दुनिया मे अपनेपन की, मां है सच्ची पहचान, धरती पर भगवान रूप मे, मां है प्यारा वरदान।। मां की ममता बढ़कर है, दुनिया से सारी, दुनिया के सब रिस्तों से, मां सबसे न्यारी, छाया मेंं मां की, खिलती है बगिया प्यारी, चरणों मे मां के, न्यौछावर है दुनिया सारी।। कोई नहीं करता, मां करती जो रखवाली, सुलाये बच्चे सूखे, मां गीले बिस्तर पे सोई, मां के दूध का कर्ज, न उतार पाऐगा कोई, जग बिछुड़े, ना बिछुड़े किसी की मां प्यारी।। मां का लाड़ प्यार, स्वर्ग से बढ़कर, मां का आंचल, त्रिलोकी से बढ़कर, मां की गोदी, राजसिंहासन से बढ़कर, मां रत्न, संसारी सब रत्नों से बढ़कर।।   ःःःःकल्याण सिंह चौहान "दिल" ःःःः                     ःःःःःःःःःःःःःः

तेरा सुपन्या

        ।ःःःः तेरा सुपन्याःःःः।।            ःःःःःःःःःःःः न फेर, न फेर तु तैं, स्वांणी मुखड़ी, तेरी मुखड़ी मैं, अपणू अक्स दिखेंदू।। न ढकौ, न ढकौ चदरी तू, तैं प्यारी सुरत, स्या चदरी मैं, अपणी बैरी सी लगदी।। न हो, न हो तू मेरी, क्वी बात नी च, मैं अपणू सब कुछ, तेरू सी लगदू।। न बण, न बण तू, यन अणमणी सी, दिल मैं अपणू, जख्म सी लगदू।। न फर फर फरक तू, मैं देखी, आश मैं अपणी, टुटदी सी लगदी।। सुपन्यौं  सुपन्यौं मा तू, इनि औंदी रैई, तेरा सुपन्या ही मैं, अपणा सी लगदा।।               ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःः                   ःःःःःःःःःःःःःःःःःः

व्यवंई बेटी

 ।।।।ःःःःब्यवंई बेटीःःःः।।।।   सुखी रयां बेटी, अपणा परिवार, तुम मीलू बेटी, दुनियौ कू प्यार, तुम मीलू बेटी, सैसुर आशीष अपार, तुम सुखी छां बेटी, सुखी छां हम भी।। दिल जित्यां  सभ्यूं, अपणा व्यवहार, देन सास ससुर, मां बापू मान, भै बैणौ जन मन्या, नणद द्विरु, तुम खुश छांबेटी, खुश छां हम भी।। नी क्वी बेटियूं , ब्वे बब्बू जनु लाचार, क्वी नी बेटि्यू जनु, ब्वे बब्बू मददगार, कमि रै होली बेटी, हमरा घरद्वार, लाज राखि तुमन, धन्य छां हम।। अजण्वीं दगड़ जंदा, अंजाण परिवार, त्रिलोक्यू बेटी, अलग ही विधान, दगड़ नि रैन, भक्त अर भगवान, त्याग तुम्हरा बेटी, खुश छां हम।। तीन देवियू की बेटी, मूर्ति छां तुम,  लोक संस्कृति कि बेटी,छां वाहक, छां बेटी तुम,  धर्म व्यवहारै लाज, याद तुम्हरि  बेटी, याद च हम।।           ःः कल्याण सिंह चौहान "दिल":::

प्यारौ नियम

  ।।ःः।।ःःप्यारौ नियमःःः।।ःः।।           ःःःःःःःःःःःःःः एक ही नियम च प्यार कू, कि क्वी नियम नी प्यार कू, कख, कब, कैसे ह्वे जाउ प्यार,  कख कब क्वी छोड़ जाउ यार, प्रेमी भी, क्वी नि जाणी आजतक, एक ही नियम च प्यार कू, कि क्वी नियम नी प्यार कू।। उम्र देखदु न, देखदु रंग रूप, अमीरी गरीबी देखदु न, जात पात, किलै होंदु इन, क्वी नि जाणी आजतक, एक ही नियम च प्यार कू, कि क्वी नियम नी प्यार कू।। एक नजर मिली प्यार की, ह्वेगि हलचल दिन रातै की, अजीब सी अनुभूति प्यार की, किलै, क्वी नि जाणी आजतक एक ही नियम च प्यार कू, कि क्वी नियम नी प्यार कू।। आंख्यूं शुरू, मिठ्ठू एहसास प्यार कू, कै कु सच्चु झूठु, कै कु कम ज्यादा, नपणौ पैमानु, क्वी नि जाणी आजतक, एक ही नियम च प्यार कू, कि क्वी ने यम नी प्यार कू।। विश्वास पै जिन्दा, शक पै खत्म प्यार, कु निभलु साथ, कु दगा देलु यार, प्रेमी भी, क्वी नि जाणी आजतक, एक ही नियम च प्यार कू, कि क्वी नियम नी प्यार कू।।            ःःःःःःकल्याण सिंह चौहान ःःःःःः                 ...

पित्रपक्षःः श्राद्ध

  ।ःःःःःःपित्र पक्षःःःः श्राद्ध ःःःःःः।।          ःःःःःःःःःःःःःःःःःः ऐगि पित्र पक्ष पित्रू कू, काक पूड़ि देण कू, सच्ची पित्र भक्ति कू, झूठा दिखावा कन कू।। सम्पयू गफ्फा दे नी, एक टिक्कुड़ु भी गोरा लेख, घी दूध सुपन्यौं कि छुईं, एक चा कुलि भी दे फेंक, आज श्राद्धौ खीर पूरी पूड़ि, लोखू  का देखा देखी।। ऐगि पित्र पक्ष पित्रू कू, काक पूड़ि देण कू,.... जिन्दा रैंदू ब्बे बब्बू कभी, ब्बे बाब नी बोली, गालि, डांट फटकारा सिवै, गिचु नि खोली, श्राद्धा दिन, पित्र देवाय नमोः जोर से बोली।। ऐगि पित्र पक्ष पित्रू कू, काक पूड़ि देण कू,.... ठंडियूं  राति ब्बे बाब, बिना खंतड़ि गुदिड़ि रैनि, तन ढकौणू, पुरणा धुरणा कपड़ा भी नि पैनी, श्राद्धा दिन नया कपड़ा लता, पित्र्वा निपतौ देनी।। ऐगि पित्र पक्ष पित्रू कू, काक पूड़ि देण कू,....... जिन्दा ब्बे बब्बू सेवा से बढ़कर, नी क्वी पुण्य काम, श्रवण कुमार जन बेटा मानला ब्बे बब्बू  प्रभु समान, जिन्दा ब्बे बब्बू खलयू जनु नी, पित्र काक पूड़ियू दान।। ऐगि पित्र पक्ष पित्रू कू, काक पूड़ि देण कू,......... करा ब्बे बब्बुई सेवा, अभी भी वक्त च, भोल सभ्...