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अकेले चल

        अकेले चल        ::::::::::::::: सहारे छूट जाते हैं, अक्सर दोस्त रूठ जाते हैं। अलग पहचान बनाने, अकेले चलना पड़ता है। भरोसे के सहारे, बहुत जरूरी कार्य छूट जाते हैं।।         कल्याण सिंह चौहान "दिल"

प्रेम रंगोत्सव

  "प्रेम रंगोत्सव " ########## अंखियों की पिचकारी है, भाव भंगिमा का है रंग। पास नहीं दूर हैं तो क्या, रंग लें मन से मन का रंग।। ऐसा रंग लगे साथिया, तन लगे रंग जाए मन। तन लगा रंग छूट भी जाए, छूटे ना मन लगा रंग।। रंग गया, रंग गया, मैं तो रंग गया साथिया,                                   तेरे तेरे रंग रंग गया। रंग जा, रंग जा, रंग जा तू भी साथिया,                                      प्रेम रंग, रंग जा।। सब रंगों में रंग रंगीला, प्यारा सुंदर चमकीला। मिलन की आश का हो, या हो बिरह का काला।।            कल्याण सिंह चौहान "दिल"