ऋतु
# ऋतु # तेरा कै रूप, कै रंग बसौं, ऋतु ये दिल मा। तेरा एक रूप रंग बसौंदु ऋतु, ये दिल मा। तबि तु दिखेंदि ऋतु, है का रूप, रंग मा।। तेरा कै रूप, कै रंग बसौं, ऋतु ये दिल मा।। कभी ताति- पतंगार, कभी गीलि- बसग्याल, कभी अल्डकार- चचकार, लगदि ऋतु।। तेरा कै रूप, कै रंग बसौं, ऋतु ये दिल मा।। कभी फूल रातराणि, कभी लिम्बे सी दाणि, कभी कामदेवै रति राणि लगदि ऋतु। तेरा कै रूप, कै रंग बसौं, ऋतु ये दिल मा।। कभी मस्त हिरणि, कभी जलेबी सी घिरणि। कभी प्यारौ हवनकुंड, लगदि ऋतु।। तेरा कै रूप, कै रंग बसौं, ऋतु ये दिल मा।। कभी पैलि बरखै सी कुमरियांण, कभी आगौ सी भभर्यांण। कभी घ्यू कि सी सुमरयाण, लगदि ऋतु।। तेरा कै रूप, कै रंग बसौं, ऋतु ये दिल मा।। मुखड़ि नौणै गोंदगि, होंठड़ि शैदै सी कंसळि। आंखि हिंसरै सी गोंदगि, लगदि ऋतु।। तेरा कै रूप, कै रंग बसौं, ऋतु ये दिल मा।। # कल्याण "दिल"#