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चल स्याळि पुष्पा

  " चल स्याळि पुष्पा"      ########### चल स्याळि पुष्पा, हिट मेरा पहाड़,  त्वे घुमौलू, देवतौं कि भूमी, गढ़-कुमौऊ। त्वे दर्शन करौलू, पंच केदार,पंच बद्री, साक्षात नर-नारैण, ।। चल स्याळि पुष्पा, हिट मेरा पहाड़, त्वे घुमौलू  त्वे स्नान करौलू, देव-कर्ण, रुद्र-नंद, सोन प्रयाग। चल स्याळि पुष्पा, हिट मेरा पहाड़, त्वे घुमौलू,  त्वे दिखौलू, शिव कू कैलाश, पार्वती कू मैत। चल स्याळि पुष्पा, हिट मेरा पहाड़, त्वे घुमौलू,  त्वे पिलौलू, गंगा कू जल, धारा मगरियूं कू ठंडु पाणी। चल स्याळि पुष्पा, हिट मेरा पहाड़, त्वे घुमौलू,  त्वे चौंफळा खिलौलू , ढोल-दमौऊ की थाप, हुड़क- मसक बाजै की घून।। चल स्याळि पुष्पा, हिट मेरा पहाड़,  त्वे घुमौलू, देवतौं की भूमी, गढ़-कुमौऊ।          कल्याण सिंह चौहान "दिल"

को-वा

  ##  को-वा ##       ::::::::::: अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी। अनमनि भांति, रम ग्याई, व्हीं मा ही।। अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी आंख्यूं मा, फोटो व्हीं की, सुपन्या भी व्हीं का ही। हर वक्त, सोच व्हीं की, ख्याल भी, व्हीं का ही।। अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी औंदु-जांदु, खांदु-पेंदू,नजर औंदी, भ्रमणा भी, व्हीं का ही। दु:ख-दर्दै वा, दवे-दारू, हंसी-खुशी भी, वा ह्वे ग्याई।। अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी को वा, मेरी, सूण जमाना, देख जमाना, जान प्यारी, मेरि बेटी, ह्वे ग्याई। अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी।           ## कल्याण सिंह चौहान #दिल" ## नोट-   बेटियों व बेटियों के माता-पिता को समर्पित।           निवेदन है आप अपनी टिप्पणी जरूर लिखें।           दिल से आपका धन्यवाद 🌹🌹🙏