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Showing posts from December, 2022

ईं दुनिया मा

 # # ईं दुनिया मा ## तेरु मेरु, मेरु मेरु, कुछ नी,  मनौ बैम च तेरु मेरु, मेरु तेरु, ईं दुनिया मा।। जै मायादारै रची, सरि माया,  वे मायादारौ खेल नि समझिए क्वी, , ईं दुनिया मा।। रचियांन बनिबन्या किरदार, वे का, खिलौना छां हम सब वे का हाथ, ईं दुनिया मा।। वे मायादारै, माया बड़ि मायावी, बगैर वे का, पत्ता भी नि हिलदु, ईं दुनिया मा।। लोभ दे कि भेज्यान, वे का सब, लोभ ही पापै, सरि जड़ च, ईं दुनिया मा।। मायादारै माया से, जु बचि,  व्ही सुखि च मायादारै, ईं दुनिया मा।      :: कल्याण सिंह चौहान "दिल" ::

चाय पूज्य

 :::: चाय पूज्य::::      :::::::::::::: चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च। कप भोरी जख मूं मिल जाऊ, वखी मू शुभ काज च।। चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज‌ च। मैं कू चुल्हू हवन कुण्ड, चुल्है लखड़ी हवन लखड़ी च। कितली प्रसादौ भांडू, कितली उमल्दी चाय प्रसाद च।। चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च। गर्म- गर्म चाय देखी की, मन मेरु रमसौंदू। घुट एक घूंट पे, ज्यू मां प्राण सी ऐ जांदू च।। चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च। इंसाना सोलह संस्कारूं, चाय कू ही बोलबालू च। चाय नि पूछा त बोलदन, चाय की भी औकात नी च।। चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च। क्वी भी हो कामकाज, खाणू-पेणू, छुंईं-बथ बादै बात। रिवाज पैली चाय की प्याली, अब त यूं ही संस्कार च।। चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च।           ##  कल्याण सिंह चौहान "दिल" ##

छुपाए जा रहे हो

 :: छुपाए जा रहे हो ::      ::::::::::::::::::: उठ/चल रहा है जो तुफान, तुम्हारे मन में। है क्या वह, जो दिल में दबाए जा रहे हो। साकार होगा बताओ कैसे, मन ही मन में। कुछ कहो तो, जो मन में छुपाए जा रहे हो।। इस ज़माने में, किसी के दबाए दबता है कौन। दबाए जाने वाले से ज्यादा, उभरता है कौन। जो बात कल खुलके सामने आएगी, दुनिया में। क्यों बेवजह, उसे अपने सीने में दबा रहे हो।। लिखने वाले ने क्या लिखा, लिखने वाला जाने। पढ़ने वाले ने क्या पढ़ा, पढ़ने वाला ही जाने। सुनने वाले ने क्या सुना, सुनने वाला ही जाने।  सबके अर्थ/मतलब एक से हों। यह प्रभु जाने।।           :: कल्याण सिंह चौहान "दिल"::

क्या जि बोलूं

  ###== क्या जि बोलूं==###             ####₹₹₹#### फ्योलि बोलूं, कि ब्यौलि बोलूं  पूर्णमासी सि जोन, त्वे कु क्या जि बोलूं। बोल त्वे कु क्या जि बोलूं -------- सुमन बोलूं, कि पुष्पा बोलूं, प्यार कली, त्वे कु क्या जि बोलूं। बोल त्वे कु क्या जि बोलूं -------- सुपन्यु बोलूं, कि बौम/भ्रम बोलूं, स्वर्ग परी, त्वे कु क्या जि बोलूं। बोल त्वे कु क्या जि बोलूं -------- बुरांस बोलूं, कि हिलांस बोलूं, मेरा मनै चोळि, त्वे कु क्या जि बोलूं। बोल त्वे कु क्या जि बोलूं -------- पाणी मगरि बोलूं, कि गंगा जल बोलूं  मेरा दिलै तीस, त्वे कु क्या जि बोलूं। बोल त्वे कु क्या जि बोलूं --------          :::: कल्याण सिंह चौहान "दिल" :::: साथियों हम अपनी कविता लिखकर, क्रोमा के अपने पेज पर टाइप कर, बाद में पोस्ट करने रख देते हैं कि बाद में पोस्ट करेंगे। पर हमने देखा कि हमारे पोस्ट करने से पहले ही हमारे दो तीन गीत थोड़ा बदलाव के साथ प्रसिद्ध गायकों ने गा दिये हैं। मन न करते हुए भी हम वह पोस्ट कर रहे हैं। उम्मीद करते हैं आपका प्यार वो आशीर्वाद बना रहेग...