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पवित्र गंगा (गढ़वली

 ःःःःःः पवित्र गंगा (गढ़वली)ःःःःःः         ःःःःःःःःःःःःःःःःःः अविनाशी, कैलाशी, शिवै लटूल्यूं नचदि गंगा, अविरल, अग्रसर, गौ मुख, प्रकटि गंगा।। गंगा माई तेरी जै जैकार, गंगा माई... भगीरथा तप, पित्रु तरणू, ऐगि गंगा, पृथ्वी लोक, नचदु, खेलदू कनखल हरिद्वार, बटी, मैदानू, उतरि गंगा।। गंगा माई तेरी जै जैकार, गंगा माई... शिवा सौरास से, बौगि गंगा, काम नि आई, पहाड़ू का, नदिया किनरौं, जगणि चिता, मोक्षदायिनी ह्वेगी गंगा।। गंगा माई तेरी जै जैकार, गंगा माई... शिवा कमंडल, छलकि गंगा, धुवैकि पांव, राम कृष्णा, जै मीली, अपणा स्वामी, क्षीरसागर, गंगा।। गंगा माई तेरी जै जैकार, गंगा माई... गंगा जलन,करि, संकल्प आचमन, पंच देवू देवा अर्क, गौ,गंगा, गायत्री पवित्र, यूंकु शतःशत प्रणाम, गंगा माई।। गंगा माई तेरी जै जैकार, गंगा माई... नोट..  पांच देवता जिन्हें अर्क दिया जाता है।....शिव, सूर्य, गणेश, तुलसी और शालिग्राम। धन्यवाद ःःःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःःःःःः

लगन

           ःःःः लगन ःःःः             ःःःःःःःः प्रेम-प्यार एक लगन,  स्वछंद, बंधन मुक्त, कल्पनाओं की उडान है। संसार क्या, अगल-बगल का भी न ध्यान है।। प्रेम-प्यार, मान-सम्मान, आन-बान शान है। निस्वार्थ ढाई अक्षर,  प्रेम बह्मांड ज्ञान है।।   प्यार चितचोर, प्रेम फुव्वार नाचता मोर है। प्यार मन की गहराइयों शांत, बाहर शोर है।। प्रेम एकाग्र चित, पागलपन की हद है। मां के आंचल,अतृप्त बच्चे का ध्यान है।। प्रेम बाज दृष्टि, शेर भूख, विध्यार्थी लगन है। निश्छल प्रेम, दुनिया की लगी टेडी नजर है।।             ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः

नीड़

               ःःःःःः नीड़ ःःःःःः                   ःःःःःःःःःःःः पंख निकले, पंछी छोड़ चला नीड़, भुला नाते.रिस्ते, उड़ चला अनन्त गगन, छूने ऊंचाई आकाश।। एक. एक तिनका, सम्भाले जर्जर नीड़, न जाने लौट आऐगा, एक दिन, छोड़ जाने वाला नीड़।। टूटती आश, पक्का विश्वास, कोई नीड़ नहीं कहीं और, बैठने को, जमीन के सिवाय।। ःःःःःः  कल्याण सिंह चौहान  ःःःःः