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Showing posts from March, 2021

लूट गेन

 ःःःः। लूट गेन  ःः        ःःःःःःःः भरोसू कै जौं पै, अपणु खास जाणी की।  मूण्डी गेन व्ही हमीं, उल्टु उस्तरा कैरी की।। भलमनस्यात बुरी हमरी, कि नेत जमनै की। भलू बुरु भी हमुकू, लीगेंन हमी तैं लूटी की।। अजणौ पै न, अपणौ पै देखी भरोसू कैरी की। नि छोड़ी उ घौर, नि पेंदा जख बूंद पाणी की।। दुःख नी रुप्या जाणौ कू, न धोखा खाणौ कू। सोच भलमनस्यात छोड़ूं, कि भरोसू करणै की।। सेवा सौंली भी ह्वेगी अब, केवल धेला पैसौं की। पुरणौ कु बोल, लगी पठाळ बल पित्र पूजी की।।        कल्याण सिंह चौहान "दिल"           ####₹₹₹₹₹####

क्या करूं

 ःःःः। क्या करूं ःःःः         ःःःःःःःः कुछ समझ आता नहीं, भरोसा करें किस पर। अपने ही प्यार से, लूट के छोड़ गए चौराहे पर।। ईमानदार को मूर्ख समझकर, लूटते हैं लोग। भरोसा से, भरोसे का गला घोटते हैं लोग।। हम मे कमी थी, या सब पैंसौं का खेल था। मान सम्मान मिला, जब तक पैंसा जेब था।। दुःख नहीं पैंसा जाने का, या धोखा खाने का। दुःख है ईमानदारी छोड़ू या भरोसा करने का।। होशियारी नहीं, नादानी है उनकी समझ की। नहीं करेगा मदद कोई,  लाचार मजबूर की।।       कल्याण सिंह चौहान "दिल"

मूर्ख छौं मैं

 ःःःः  मूर्ख छौं मैं  ःःःः       ःःःःःःःःःः मूर्ख छौं, गंवांर छौं, पागल छौं मैं, बोलदन मेरा घौरा लोग मैं कु ।। हर कै पै भरोसु करदौ मैं,  हर कै इमानदार समझदौ मैं, हर कै अपणु जनू समझदौ मैं, यु ही मेरू कसूर।। हर कैसे धोखा खांदु मैं,  हर क्वी छल जांदु मैं, हर क्वी लूट जांदु मैं,  यू ही मेरू कसूर।। हर क्वी अपणा जनु लगदु मैं,  हर क्वी विश्वासी लगदु मैं, हर कैमा मासूमियत दिखेंदी मैं,   यू ही मेरु कसूर।। क्वी बताउ,  अफरी ईमानदारी किलै छोड़ु मैं, कै पै भरोसु कन, किलै छोड़ू मैं, यू ही मेरू कसूर।। भ्यारा त भ्यारा, अपणा भी लूट जंदन मैं, अपणा भी धोखा दे जंदन मैं,  यू ही मेरू कसूर ।। द्वी चार दिनै परेशानी होंद,  फिर क्वी क्या धोखा देलु मैं, क्वी क्या छललु मैं।। एक दिन छलणवलु, खुद ही छले जलू, धोखा खलु अफी सै, बचि भी जलु यदि, भगवान खुद छलौलु वे, मैं अपणु भरोसु, ईमानदारी किलै छोड़ू।।        कल्याण सिंह चौहान

त्वे मा

 ःःःः। त्वे मा। ःःःः       ःःःःःःःः क्वी त बात होलि त्वे मा,  जु मेरु मन लगि त्वे मा ।। न जणि क्या खास बात, मेरा मनन देखि, त्वे मा ।। न जणि क्या चीज, मेरी आंखि खोजदि त्वे मा ।। न जणि क्या जादू त्वे मा,  मेरु ध्यान लगियू रैंदु त्वे मा ।। न जणि कन पाणि त्वे मा,  मेरी तीस बणी रैंदी त्वे मा ।। न जणि क्या खूबि त्वे मा,  मेरी रटन लगियूं रैंदु त्वे मा।। मेरु मन यनि भटकुणू , कुछ त हां ना बोल मैं मा।।       कल्याण सिंह चौहान

फूलदेई

 ःःःः। फूलदेई  ।ःःःः        ःःःःःःःः रंग बिरंगा फूल फूल्या, बसंत ऋतु चैत मैना। फुलदेई पर्व सूर्य प्रविष्टि, मीन राशि चैत मैना चला फुलारियूं उठा फुलारियूं बिनसरि जौला,  पैला दिन, धूप करी की ज्यूंदाल पिठैं चड़ौला, न्यूती कि फ्योंली बुरांस फूल, फुलकंडि धरला। भौंरा पोतलौं का अंण छूयां सौदा फूल लौला, देवतौं का मंदिरूं, घौरा का मोर-संघाड़ू शीश नवै,  सौदा फूल्वी, भेंट जै कि देईं, वे का निप्त चढ़ौला, सुखी हौं सभी है बंध, बणियूं रौ आपसी भाईचारा,  भोरियां रौन भंडार सभी का, कम न हो खौ खाजा‌।।          कल्याण सिंह चौहान"दिल"

सरिता

 ःःःः। सरिता ।ःःःः        ःःःःःःः  सरिता इक प्यासी धारा, निरंतर बहती, अपने पथ, आश मिलन प्रियतम की ।। थकेहारे प्यासे, हुए तरोताजा, आके तुम्हारे किनारों पर, प्यासा जाने, प्यास बुझी या बढ़ी।। तुम अपने पथ, आगे बढ़ चली, पीछे छूटे सब, रिस्ते भूल गई, बिरह अग्नि तड़फने, छोड़ गई।। प्रेम पवित्र हुआ कोई, डुबकी लगा,  भव पार हुआ कोई, तुममें डूब के, कोई आते जाते भावों, खो गया।। तुम बढ़ती, मैली हो खारा होने, दुनिया पवित्र माने तुम्हें, सच तुम जानो या प्रभु जाने।। सरिता इक प्यासी धारा।।        कल्याण सिंह चौहान

होली के रंग

 ःःःः  होली के रंग ःःः        ःःःःःःःः रंग ले, रंग ले, होली के रंग, रंग ले, होली के रंग, खुशियों के रंग, रंग ले।। रंग ले, रंग ले, होली के रंग, रंग ले  तन रंग ले, तू मन रंग ले, नई उमंगों के संग, अंग अंग रंग ले ।। रंग ले, रंग ले..... रंग दुनिया के रंगों के रंग,   दुनिया को रंग, तू अपने ही रंग।। रंग ले रंग ले.... होली के रंग, मैं न मैं रहूं, तू न तू रहे, ऐसा सच्चा प्यार का रंग, रंग ले, रंग ले, रंग ले..... कान्हा के रंग, तू श्यामा के रंग, रंग ले, ऐसा रंग, रंग ले, कि रंग छूटे ना।। रंग ले, रंग ले, होली के रंग, रंग ले.....।।         कल्याण सिंह चौहान"दिल"

अपणु दुःख

 ःःःः  अपणु दुःख ःःःः         ःःःःःःःःःः अपणु दुःख कै मा लगौण,  कै मा सुणौण।। घुटुदु छौं त, गिचु फुकेंदू, थुकुदु छौं त, दूध खतेंदू।। अपणु दुःख.... भ्यार बोलदौ, बदनामी होंद, भीतर रखदौ, उकताट होंद।। अपणु दुःख... भ्यारौ देयूं दुःख, अपणा बंटदा, अपणौं कु देयूं दुःख, क्वी नी बंटूदू।। अपणु दुःख... बबलौंदा होंठूं, हैंसण पोड़दू, डबलौंदि आंख्यूं, खुश रैण पोड़दू।। अपणु दुःख... बिरली मरी, सभ्यूंन देखि, दूध खतियूं, क्वी नी देखदू।। अपणु दुःख..... रात्यूं सिरणु, भिगौंदा आंसू, अफी तै अफी, समझौण पोड़दू।। अपणु दुःख कै मा लगौण,  कै मा सुणौण।।          कल्याण सिंह चौहान

उमा

 ःःःः  उमा ःःः     ःःःःःःःः उमा ये उमा, प्यारी उमा।। अंधेरी रात, गैंणौं बीच, चमकदि जोन उमा। उमा ये उमा, प्यारी उमा।। देवतौं का भ्यांरौं, जगदि जोत, सजदी उमा। उमा ये उमा, प्यारी उमा।। ढोल्वी दगड़, मसका बाजै, सुरीली धुन उमा। उमा ये उमा, प्यारी उमा।। रूढ़ियों का दिनू, लिम्बै सी दाणी, रसीली उमा। उमा ये उमा, प्यारी उमा।। भजन कीर्तन्वी दगड़,  आरती सी उमा। उमा ये उमा, प्यारी उमा।। परछै सी दगड़, सरग सी दूर, परी सी उमा। उमा ये उमा, प्यारी उमा।। नौनियलू सी मयली, सयणों सी सयणी, छप छपदी उमा। उमा ये उमा, प्यारी उमा।। तीस सी तीसी, भूख सी भूखी, अपणी सी उमा। उमा ये उमा, प्यारी उमा।। मन्जूनाथ कल्याणै, प्यारी उमा। उमा ये उमा, प्यारी उमा।।         कल्याण सिंह चौहान

गणेश वंदना

 ःःःः गणेश वंदना ःःःः ःःःःःःःःःःःःःः जय गौरीसुत, शिवनन्दन, गणपति महाराज। जय प्रथम पूजित देव, गणनायक गणराज ।। जय भालचंद्र, सिन्दूर वदन, धूम्रवर्ण महाराज। जय विघ्नहर, विघ्नेश्वर, विघ्नहर्ता गणराज ।। जय चतुर्भुज, शशिवर्ण, गजकर्ण महाराज । जय मंगलमूर्ति, महाबल, सिध्दिविनायक गणराज।। जय एकदन्त, लम्बोदर, गजानन महाराज । जय एकाक्षर, मूषकवाहन, गदाधर गणराज ।। आया शरण तुम्हारी, जय वक्रतुंड महाराज । कल्याण करो मूक्तिदायी, जय प्रशन्नवदन गणराज ।। जय गौरीसुत, शिवनन्दन, गणपति महाराज। जय प्रथम पूजित देव, गणनायक गणराज ।।               कल्याण सिंह चौहान

श्रद्धेय नारी

 ःःःः श्रद्धेय नारी ःःःः     ःःःःःःःःःःःः तुम अबला, निर्बल शक्तिहीन, कमजोर, आंसू बहाती हो। अज्ञानी, मूढ, पुरूष प्रद उपमाएं, तुम भी स्वीकारती हो।। आज समय है, तुम्हारी हनुमान सी शक्ति जगाने का। नारी प्रकाशपुंज, आकाश तक चहुंओर फैलाने का।। तुम हो मां, पृथ्वी, अन्नपूर्णा, हो उत्पति संसार की। तुम हो प्रेम, वात्सल्य, ममता, हो धारा करुणा की ।। तुम प्रथम गुरू, प्रथम स्पर्श, हो प्रथम आश्रय। तुम हो मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, हो शक्ति श्रोत।। वे कंधा से कंधा मिलाकर चलने को कहते हैं। जिनका बोझ रोज तुम, अपने कंधों ढोती हो।। नारी शक्ति तुम्हारी जय, तुम्हें सादर प्रणाम है। पहले नाम तुम्हारा है, फिर आता राम श्याम हैं।। सौ सवालों का एक जबाब, नारी विशाल है। नारी अपने आप में, दुनिया मे एक मिशाल है।।       कल्याण सिंह चौहान "दिल"