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Showing posts from October, 2021

हड्डगियू सान

 ःःःः हड्डगियू सान ःःःः       ःःःःःःःःःः रसी गौला अडगी, होणू हड्डगियू कु सान। हड्डगियू कु सान। निबचि ब्वे बब्वीई, भै बैणौं दगड़, भ्यार होणू, एकता कु गान। हड्डगियू कु सान। औरु कि नजर अकरु-ककरु, मेरा काले नजर बड़ा बखरु। आजकल दुनिये नजर, तुम्हारी धन दौलत, बाकि क्वी अपणु न बिरणू। मेरा काले नजर बड़ा बखरू।। बग्वाल बीति, द्वी सारि रीति। ज्वनी अर मालताल जब तकै, तब तकै दुनिया अपणी। बुढ़पा अर खालि कीसा क्वी न पूछा हम पै क्या बीति। द्वी सारि रीति। भैंसौ मोल, भैंसा का ढंमणौ कू। गरीब ब्वे-बब्बून पांच-छः बच्चा पलेन। अब नौना बोलदन, तुमू जी कमा कि,  बाल बच्चा अपणौ कू।  भैंसा ढंमणौ कू। पित्र पूजि बल, लगि पठाल। बुरु कै त मिलदि-मिलदि, आजकल त भलु कै भी मिलदि गाअल। लगि पठाल।।         कल्याण सिंह चौहान।

उ दिन

 ःःःः  उ दिन - U DIN ःःःः       ःःःःःः भला बुरा जना भी छा, अच्छा छा उ दिन। घुमचे-घुमचे स्कूल औणु-जाणू। स्कूल नि जाणौ ढुंढण बानू।। भला बुरा जना भी छा, अच्छा छा उ दिन। पोति-पाती स्लेट पाटी,खूब घोट्या लगाणू। द्वी एकम द्वी कु पाडू़, जोर जोर से पढ़णू।। भला बुरा जना भी छा, अच्छा छा उ दिन। बुवे बब्बू न फिकर छै, हमरी पढ़ै-लिखै की। न कभी ब्वे-बब्बू, स्कूल औणु जाणू।। भला बुरा जना भी छा, अच्छा छा उ दिन। कला छै, कितब्बू जिल्द लगै। तरतीब से बस्ता सजाणू। स्कूला सिवै, कभी बस्ता खोली नि देखणू। भला बुरा जना भी छा, अच्छा छा उ दिन। लोख्वी मुंगरि कखड़ि चोरी कै, खै जाणू। मुर्गा बणी, मार खै, कभी नी शर्माणू।। भला बुरा जना भी छा, अच्छा छा उ दिन। खै पे, झट से जाणू पढ़णु आउ नि आऊ, विद्या माता रौ खुश। मोर पंख, कितब्बू भितर सजाणू।। भला बुरा जना भी छा, अच्छा छा उ दिन। घूमि-घूमी सभ्यूं, नया कपड़ा जुता दिखाणु। समझ नि छै, नि क्वी ब्वे-बब्बू जनु अपणु।। भला बुरा जना भी छा, अच्छा छा उ दिन।              कल्याण सिंह चौहान

प्यारौ नी जमनु

 ःःःः प्यारौ नी जमनु ःःःः         ःःःःःःःःःः प्यारा सिवै, मैं कुछ औंदु नी। जमना कै कु प्यार, स्वांदु नी।। एक प्यार ही च, जै हर क्वी चांदु। अपणु चुप सै, है कौ बदनाम चांदु।। सच्चै दगड़, रौणै कोशिश कर दौ। जमना सच्चै, पसंद औंदि नी च।। भलै सिवै, मैं कुछ जणदू नी। मुफ्तै भलै, जमना पचदी नी।। दयाभाव मैं, छोड़दु नी। ल्वै तिस्वलुउ जमनु, दया जणदु नी। मदद करणै, करदौ कोशिश। जमना स्वार्था सिवै, कुछ दिखदु नी।। प्यारा सिवै, मैं कुछ औंदु नी। जमना कै कु प्यार, स्वांदु नी।।             कल्याण सिंह चौहान

मुफ्त प्यार

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 ःः ‌‌मुफ्त प्यार - ःः     ःःःःःःः मुझ को प्यार के सिवाय, कुछ आता ही नहीं। दुनिया है जिसे, किसी का प्यार सुहाता ही नहीं।। एक प्यार ही तो है, जिसे हर कोई चाहता है। अपना गुप्त, व दूसरों का बदनाम चाहता है।। न जाने क्यों, किस बात पर, नाराज हैं वे मुझसे। बात करना तो दूर, आंखें चुराने लगे हैं वे मुझसे।। हम ने जो दिया, समझ वह हमारा प्यार ही तो है। तुम्हारी चाहत सीमाऐं लांघें, लोभ नही तो क्या है।। हम लुटे नहीं हैं, हमने तो प्यार मेंं लुटना सीखा है। प्यार सौगात प्रभु की, तुमने उन्हें भी दिया धोखा है।     ःः कल्याण सिंह चौहान "दिल" ःः

हाय रे जमाना

 ःःःः हाय रे जमाना - HAYE RE JAMANA ःःःः     ःःःःःःःःःःःः हाय रे जमाना, कनू आई। मल्लि-मुल्ली, वल्लि-पल्ली, बांजि पोड़िगेन, गौं कि सारी। हाय रे जमाना, कनू आई। काम-काज नि रै गौं मा, सुबेर-व्यखन घुमणी बेटि-बुवारी। हाय रे जमाना, कनू आई। गौड़ि- भैंसी, बलद्वी जोड़ी, गौं मा एक आद, कै का चौक, होयूंच, कुत्तों पलणू, कु शौक। हाय रे जमाना, कनू आई। बखरा-कुखड़ौं कि पलीई डार, लोभ, पैंसा आला, कीसा चार। हाय रे जमाना, कनू आई। घौरौ दूध घीऊ, स्वर्गै बात, बूढ़-बुढ़िया, नौना- बाला, दूध-घीऊ से, सभी लाचार। हाय रे जमाना, कनू आई। दारु-जुऔं, मर्द मस्त, कीर्तनू, नाच गांणौं, जननी व्यस्त, घर गिर्स्थीयू चक्र ध्वस्त। हाय रे जमाना, कनू आई।       ःः कल्याण सिंह चौहान ःः