नेट की दुनिया
##-= नेट की दुनिया=## ######### नेट पर लाखों, अंजान दोस्तों के दोस्त हैं हम। सच उनमें सच्चे मित्र एक दो से भी हैं कम।। भ्रमयुक्त माया की दुनिया में, जी/ रह रहे हैं हम। सच्चे हितैषी परिजनों से, बहुत दूर हो रहे हैं हम।। कितने ज्ञानी/ अज्ञानी, समझदार/ ना समझ हैं हम। मृत्यु/दुर्घटना पर संवेदना नहीं, लाइक कर रहे हैं हम।। नेट पर हर अच्छी बुरी बात को, शेयर कर रहे हैं हम। अपनों का हालचाल पूछने में भी, झिझक रहे हैं हम।। सांसारिक जानकारी/ ज्ञान के लिए, नेट में है दम। बिना नेट मस्तिष्क शून्य/ ज्ञान शून्य हो रहे हैं हम।। अपने/अपनों से अनभिज्ञ, नेट पर ज्ञान दे रहे हैं हम। अपनों के सिवाय कोई न आएगा काम, जान लें हम।। भेजते रहो रोज शुभ संदेश तो, ज़बाब देते हैं कुछ लोग। न भेज सको कुछ दिनों, तो किसी को क्या कैसे हैं हम।। // कल्याण सिंह चौहान "दिल"//