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Showing posts from September, 2022

नेट की दुनिया

 ##-= नेट की दुनिया=##          ######### नेट पर लाखों, अंजान दोस्तों के दोस्त हैं हम। सच उनमें सच्चे मित्र एक दो से भी हैं कम।। भ्रमयुक्त माया की दुनिया में, जी/ रह रहे हैं हम। सच्चे हितैषी परिजनों से, बहुत दूर हो रहे हैं हम।। कितने ज्ञानी/ अज्ञानी, समझदार/ ना समझ हैं हम। मृत्यु/दुर्घटना पर संवेदना नहीं, लाइक कर रहे हैं हम।। नेट पर हर अच्छी बुरी बात को, शेयर कर रहे हैं हम। अपनों का हालचाल पूछने में भी, झिझक रहे हैं हम।। सांसारिक जानकारी/ ज्ञान के लिए, नेट में है दम। बिना नेट मस्तिष्क शून्य/ ज्ञान शून्य हो रहे हैं हम।। अपने/अपनों से अनभिज्ञ, नेट पर ज्ञान दे रहे हैं हम। अपनों के सिवाय कोई न आएगा काम, जान लें हम।। भेजते रहो रोज शुभ संदेश तो, ज़बाब देते हैं कुछ लोग। न भेज सको कुछ दिनों, तो किसी को क्या कैसे हैं हम।।    // कल्याण सिंह चौहान "दिल"//

प्यार की शिकायत

 ##:: प्यार की शिकायत ::##         ########## तुम्हें शिकायत है हम से, प्यार कर, हम तुम्हें भूल गए। तुम क्या जानो, प्यार क्या है,  प्यार किसे कहते हैं, प्यार में किसे होश, कौन होश में आए, खोए हैं तुम्हारे प्यार,  तुम्हारी यादों में। "दिल" फूल नहीं, तोड़ के तुम्हें दे दूं, दिल तुम्हारा है, सिर्फ तुम्हारा, जान लो तुम।।          :::: कल्याण सिंह चौहान "दिल"

सूखा गुलाब

 सूखा गुलाब  ::::::###::::: एक पड़ाव प्यार के, एक प्राण, दो शरीर, दूर हो गए। संदेश भी बंद, कि उम्र नहीं प्यार की, लोकराज दुनिया की, प्यार है गुनाह। मेरा प्यार, प्रेमियों की किताबों में रखा, सूखा गुलाब हो गया।। तोड़ के "दिल" पुष्प किसी और के, प्यार में पुष्प गुच्छ हो गई।।       #### कल्याण सिंह चौहान "दिल"

ढलती उम्र

।।‌- ढलती उम्र-।। :::::::::::::::::::: बीती जवानी, देखते/मिलते उसे, भाव न जगा कभी, कोई मन में। अनजाने/अचानक किसी के प्रति, देख निस्वार्थ सेवा भाव उसका। उम्र के ढलते पड़ाव, मन में उथल-पुथल हो, " दिल" की कली, सुमन हो खिल गई।।           :::: कल्याण सिंह चौहान " दिल":::::