क्वी
## क्वी ## //////////////// सुपन्यळि आंख्यूं का सुपन्या, चुरै लीगि क्वी। घुंघरेळि आंख्यूं की नींद, उडै लीगि क्वी।। जांण न पैछाण, अंग्वाळ मारी, अपणु बणिगि क्वी। अकेलु मन छौ मेरू, उपरी मन मनमा बसिगि क्वी।। सुपन्यळि आंख्यूं का सुपन्या, चुरै लीगि क्वी------ छौंदु कुटुम्बदरि/ दगड़यौं का, अकेलु कैगि क्वी। भोरि ज्वनि, न जणि, क्या रोग, देगि क्वी।। सुपन्यळि आंख्यूं का सुपन्या, चुरै लीगि क्वी---- खाण पेणा दिन छा मेरा, भूख तीस लीगि क्वी। छाळि/सचेत गत मेरी, सुनपटिया/अळगिसि बणैगि क्वी।। सुपन्यळि आंख्यूं का सुपन्या, चुरै लीगि क्वी---- गौं न गौळौ, नाता न पातौ, अजाण क्वी। समळौण्या-खुद्यौण्या, खुद देखिए क्वी।। सुपन्यळि आंख्यूं का सुपन्या, चुरै लीगि क्वी। घुंघरेळि आंख्यूं कि नींद, उडै लीगि क्वी।। कल्याण सिंह चौहान "दिल"