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Showing posts from July, 2022

भूल जाना अच्छा

ःः ःः  भूल जाना अच्छा ःःःः          ःःःःःःःःःःःःःः पानी पर दिखती तस्वीर, मिटी पानी हिलने के साथ। दर्पण पर दिखती तस्वीर, आती नहीं किसी के हाथ। नींद में दिखते सपने खत्म हुए, आंख खुलने के साथ। भूलना उन्हें अच्छा, बदले जो अपने मतलब के साथ।। कभी उनकी, हमारी बांहों में बांहें, आंखों आंखों में बात। मिलना तो दूर, टालने लगे वे अब, हमसे करना भी बात। दाना चुग, उड़ चले वे, अपने नये ठिकाने की तलाश। मतलबी अपने मतलब तक ही, किसी के भी साथ।। हम न टूटे, न बदले, हमने अपने आप को समझा लिया। साथ बिताए पलों को, हमने जीने का नशा बना लिया। जानकर भी अनजान बने रहे हम, रिस्ता निभाने को। मतलबी एक पल मे बदल गए, एक नये बहाने के साथ।। अपने पन के ये रिस्ते भी यारों, कितने अजीब होते हैं। मतलबी मौज करते हैं, सच्चे लोग हमेशा ठगे जाते हैं।। ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः

अपनी बेबसी

ःःःः  अपनी बेबसी ःःःः ःःःःःःःःःःःःःःःःःः अपनी बेबसी की व्यथा, क्या सुनाऊं किसी को। कहने को सब हैं मेरे, पर मुझ से क्या किसी को।। मुझसे अपने मतलब की, उम्मीद है हर किसी को। अपनी उम्मीद के सिवाय, मुझसे क्या किसी को।। सच है, मेरा अपना सब कुछ है, मेरे अपनों को। मेरे सिवाय, मेरा सब कुछ चाहिए, हर किसी को।। दिन रात एक किये मैंने, जिनकी की खुशियों को। मेरे पास एक पल, रूकने का समय नहीं किसी को।। शिथिल होती देह मेरी, अखरने लगी, मेरे ही अपनों को। राम सा सत्य है जो, इंतजार है उस पल का हर किसी को।।   ःःःः  कल्याण सिंह चौहान ःःः

मेहंदी च रात

मेहंदी च रात ःःःःःःःःःः खुशी च बात, मेहंदी च रात, खुशनुमा मेहंदी रचणी, ब्यौला ब्यौली का हाथ।। खुशी च बात, मेहंदी च रात..... भोल द्वी अजाण, धरी हाथू मा हाथ, एक हैकै की जान, ह्वे जाला एक साथ।। खुशी च बात, मेहंदी च रात........ ढोल दमौ बजा, बजा मसकबाजु, डी जे कु साज, नाचा, कूदा, दगड़ियों दगड़, खुशी की रात।। खुशी च बात, मेहंदी च रात..... पुरणौं की रीत, गा मांगल गीत, जीवनसाथि मिलणू, मिलणू मन कु मीत।। खुशी च बात, मेहंदी च रात.... बचपन कु दगड़ु, छूटलु घुमचे.घुमचे छुईं बतु खिकत्याट, शरीर कखि, मन कखि, आंखि पिया बाट।। खुशी च बात, मेहंदी च रात........            .....कल्याण सिंह चौहान....