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ढाई अक्षर का शब्द

ःः  ढाई अक्षर का शब्दःःः     ःःःःःःःःःःःःःःःः ढाई अक्षर जन्म मृत्यु पूर्ण सत्य, अग्र मध्य अन्त लिप्त ज्ञान। पृथ्वी कुण्ड रिद्धि सिध्दि पूर्ण है, प्राणी रिक्त वक्र प्राय ध्यान।। अंग संग, दो अर्ध के प्यार प्रेम, एक श्वास युक्त वक्त मेंं। जन्म, मांस पिण्ड, श्वास प्राण, रक्त अस्थि, युक्त है ।। ग्रंथ सन्त, शब्द अर्थ, धर्म कर्म, मुक्ति मार्ग है। अर्थ स्वार्थ, शत्रु द्वेष, घृणा क्रोध, मृग तृष्णा है।। सच्ची श्रद्धा भक्ति, त्याग निष्ठा, पूर्ण शांति सन्त है। मृत्यु, सांग अर्थी, चिता अस्ति, अग्नि भस्म अन्त है।। श्वास लुप्त, अस्थि अर्थी, अस्त अग्नि कुण्ड मे। तृप्ति अर्ध, भाग्य तृष्णा,  शत्रु व्यथा,  मुण्ड मे।। ओउम् श्रुति, मंत्र ध्वनि, यंत्र ध्यान, आत्म तत्व है। शंभु शक्ति, विष्णु लक्ष्मी, ब्रह्म स्वर, सृष्टि व्याप्त है।। ःःःकल्याणसिंह चौहान ःः

दर्द

सुनेगी हाल जब, मेरे दर्दे दिल का। क्या आंसू तब वी.ना बहाऐगी।।     कल्याण सिंह चौहान "दिल"

राहों

वीना लगाया था तुझे, गले अपने। बनकर साधक, तेरी साधना करूंगा। क्या मालूम था दिल, खातिर तुम्हारी। राहों में मैं, मनोरंजन का साधन बनूंगा।।   कल्याण सिंह चौहान "दिल"

पंगु

पांवों पे अपने मैं, हुआ खड़े होने को। करीब आई वह मेरे, बैसाखी बनकर।  दिल पंगू बनाकर, चौराहे पर यारों। छोड़ गई वह हमें, अजनबी बनकर।।       कल्याण सिंह चौहान

साथ

कौन किसी का साथ देता है यहां। कौन किसी का होता है यहां।  सच मे, दिल से कहता हूँ दोस्तों। हर कोई अपना ही रोना रोता है यहां।।    कल्याण सिंह चौहान "दिल"

आग

  चिंगारी की आग से डर, न दरिया की।  दोस्तों दिल ने प्यार में जलकर देखा है।।      कल्याण सिंह चौहान

दुःख

किसी की खुशी में खुश होना, अच्छी बात है ।  किसी के दुःख मे, दिल से शामिल होता हूं मैं।।       कल्याण सिंह चौहान

गुनाहगार

  हकीकत जब भी जाननी चाही, दोस्तों की मैंने।  ऐ दोस्त अपने दिल को ही गुनाहगार पाया मैंने।।       कल्याण सिंह चौहान

सुर

  चाह था मैंने,  दिल के सुरों को।                मिलाना वी.ना के, सुरों के साथ। प्यार से मिलाने की फिराक मे,                           दिल के तार ही टूट गए।।                  कल्याण सिंह चौहान

हमदम

वीना किया तुमनें राज मुझ पर,  मेरे मन की मोहनी बनकर। मेरे जख्मों पर नमक लगाने ही आई थी,  मेरी हमदम बनकर।।       कल्याण सिंह चौहान

दिल के पास

  सभी कहते हैं अपने दिल की सुनो,                          अपने दिल की कहो यारों ।  कोई यह क्यों नहीं कहता,              कभी अपने दिल से भी मिलो यारों ।। दिल सभी के पास होता है यारों। पर हर कोई इसके पास नहीं यारों।।             कल्याण सिंह चौहान

अपने

लोग कहते हैं सूरज से जलन होती है। मैंने भरी बरसात मे दिल जलते देखा है। दिल से कहता हूं दोस्तों सच मानो। किस्मत अपनी मैने अपनों को लुटते देखा है।।       कल्याण सिंह चौहान