मीरा बन के देख
मीरा बन के देख ःःःःःःःःःःःः अमर होने जरूरी नहीं, कि अमृत ही पिया जाय। कभी जहर का प्याला, मीरा बन के पी के तो देख।। चांद तारों की क्या बात, दुनिया मुठ्ठी मे होगी। कभी किसी की बाहों मे, सिमट के तो देख।। कौन कहता है, सपने रात मे सोते ही दिखते हैं। दिन में भी दिखेंगे, किसी से दिल लगा के तो देख।। प्यार सच्चा झूठा नहीं, प्यार तो शीशा होता है। खुद शीशा बनके, अपने को अपने शीशे मे तो देख।। कहते हैं दुनिया मे, सच्चा प्यार कौन करता है। समर्पित भाव से, खुद को समर्पित करके तो देख।। कहते हैं मौसमों का, एक निश्चित समय होता है। पल मे मौसम बदलते रहेंगे, प्यार करके तो देख।। ःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः