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Showing posts from February, 2021

बहू मायका. ससुराल

 ःःःः  बहू मायका. ससुराल ःःःः         ःःःःःःःःःःःःःःःः जिनके कलेजे के टुकड़े लाए हैं हम, अपनाने को, लाखों कमियां गिनाते हैं वे, हमारे घर के पालने में।। मायके से ज्यादा, ससुराल में सम्पन्नता मिली उन्हें, मायका परिपूर्ण है, कमियां गिनाते हैं वे ससुराल में।। ससुराल की नींव हिला, मायका भी अशांत करती हैं, ससुराल की छोटी से छोटी बात, बता कर मायके में।। ससुराल से दूर कर देता है, मायके का मोह लड़की को, गलत सीख मां बाप की, बसने नहीं देते बेटी ससुराल में।। हस्तक्षेप करते हैं जो मां बाप, बेटी के ससुराल में। उनका जीवन नर्कमय है, इस लोक व परलोक में। मंत्र है सुख शांति युक्त रखने का, अपना घर संसार। रिस्ता जोड़िए लाडलों का, अपने सम-उच्च परिवार में।।           कल्याण सिंह चौहान " दिल"

हम न बदलेंंगे

 ःःःः  हम न बदलेंगे ःःःः        ःःःःःःःःःः तुम विश्वासघात करे जाओ, हमारा विश्वास कम न होगा ।। तुम छल पे छल किए जाओ, हमारा प्यार कम न होगा ।। तुम दुश्मनी करते जाओ, हमारी दोस्ती कम न होगी ।। तुम दुःख पे दुःख दिए जाओ, हमारी मुस्कराहट कम न होगी ।। तुम कटु वचन कहे जाओ, हमारी दुआएं कम न होंगी ।। तुम राहों में कांटे बिछाए जाओ, हम कांटे चुन , फूल बिछाए जाऐंगे ।। तुम नफरत फैलाते जाओ,  हम प्यार बांटते जाऐंगे ।। तुम मुठ्ठी भींचे ही चले आओ, हमारी बांहे तुम्हें गले लगाने तैयार रहेंगी ।।       कल्याण सिंह चौहान

भरोसे का भरोसा

 ःःःः  भरोसे का भरोसा  ःःःः          ःःःःःःःःःःःःःः भरोसे का भरोसा, भरोसे से तोड़ते हैं लोग। मतलब को प्यार का, मुखौटा ओड़ते हैं लोग। अक्सर अपने दुश्मनों से, सतर्क रहते हैं लोग। इतिहास साक्षी है, अपने ही जहर देते हैं लोग।। किसीका भरोसा जीतने क्या नहीं, करते हैं लोग।  लूटने का अहसास भी, नहीं होने देते हैं लोग। हुनर भरोसा तोड़ने का, कहां से सीखते हैं लोग। अपनों ने भरोसा तोड़ा, लुट के सोचते हैं लोग।। दुनिया के दिए घाव, महसूस न हुए अपनों के साथ। तस्सल्ली से नमक लगा के, दिए जो घाव अपनो ने। उनकी किसी को न खबर हुई, न कभी खबर होगी। अपनों की बात बाहर नहीं जाऐंगी, जानते हैं लोग।।           कल्याण सिंह चौहान

फाल्गुन आयो रे

ःःःः फाल्गुन आयो रे ःःःः      ःःःःःःःःःःःःःः नमो मां सरस्वती, नमो गौरी सुत गणेश, प्रथम पूजन आपका, आयो रंगीलो बसंत।। बोलो सा रा रा फाल्गुन आयो रे, आयो रंगीलो बसंत ।। धरती ने ओढ़ी सतरंगी चादर, ऋतुराज बसंत आयो रे।। बोलो सा रा रा फाल्गुन आयो रे, आयो रंगीलो बसंत।। सरसों फूली, आम बौराए, कोयल करे गान रे।। बोलो सा रा रा फाल्गुन आयो रे, आयो रंगीलो बसंत।। मस्ती मे झूमो, गाओ, मदमस्त फाल्गुन आयो रे।। बोलो सा रा रा फाल्गुन आयो रे, आयो रंगीलो बसंत।। कान्हा की बंसी बाजे, राधा गाए फाग रे।। बोलो सा रा रा फाल्गुन आयो रे, आयो रंगीलो बसंत।। हर रंग के रंग, बसंत, हर रंग देता, प्रेम संदेश रे।। बोलो सा रा रा फाल्गुन आयो रे, आयो रंगीलो बसंत।।        कल्याण सिंह चौहान"दिल"

बसन्त

 ःःःः बसन्त ःःःः  ःःःःःःःःःःःःः कोयल गान करे, धरती ने ली अंगड़ाई है। रंगबिरंगा चोला ओढ़े, ऋतु बसन्त आई है।। आगमन ऋतुराज का, धरती रतिरूप बौराई है। फूलों संग भौंरे करेंं ठिठोली, ऋतु बसन्त आई है।। अलंकृत रस छंद युक्त, कान्हा ने बंसी बजाई है। पिया मिलन को राधा मचले, ऋतु बसंत आई है।। भांति.भांति के फूल खिले, भांति. भांति की रंगाई है। मस्त मौसम हर दिल मस्ती छाई, ऋतु बसंत आई है।। पीली. पीली सरसों फूली, खेतों फसलें लहराती हैं देख हर्षित किसान मन हुआ, ऋतु बसंत आई है।। संचार हुआ नव चेतन का, नव उमंग छाई है। ठंड नहीं मौसम मे गर्माई है, ऋतु बसंत आई है।। मिल गाओ फाग सब, ऋतु बसंत आई है। रंग बिरंगा चोला ओढ़ ,ऋतु बसंत आई है।।                 कल्याण सिंह चौहान"दिल"

बेटी. ससुराल. मायका

 ःःःः  बेटी. ससुराल. मायका ःःःः         ःःःःःःःःःःःःःःःः दिये जिन्हें अपने कलेजे के टुकड़े, उनका घर सम्भालने, कहते हैं वे लाखों कमियां हैं, तुम्हारी बेटी में गिनाने को।। मायके रहीं जो परियों सी, उन्हीं का जीवन बन गया कहानी, न शिकायत की कभी, न तैयार ससुराल के खिलाफ सुनने को।। हमारी सच्चाई साफ बोलना, बना हिस्सा, बेटियों के जीवन का, आंगन खुशियों से भरने लगा, बेटियां अच्छी लगने लगी सबको ।। उन्हें अब हमारे कलेजे के टुकड़े  अपने से लगने लगे हैं। अब वे भी खुश, वह भी खुश, सजाने में अपने गुलशन को।।      कल्याण सिंह चौहान 'दिल "

भौं कुछ

 ःःःःः भौं कुछ। ःःःःः भौं कुछ बोलदा लोग, भौं कुछ । मुण्ड कपाल चौड़ि नशा, भौं कुछ बोलूदू। किलै लोग बोलदा, पेणू सब कुछ भूलौणू।। भौं कुछ.. भलु बूरू गुस्सा ह्वे की, सब कुछ बोलदा लोग। चुप रै भी कुछ लोग, भौं कुछ बोलदा।। भौं कुछ... बनि बन्यू खाणू, समणि धरियूं हो। जरूरी नी च, भूख खाणै हो।। भौं कुछ बोलदा... सुपन्या रात्यूं, सियां दिखदा लोग। उनींद आंख्यूं, सुपन्या लक्ष्य पाणा।।भौं कुछ.. लोखु दिखेंदी, आकाश जोन। कैकि जोन, आंख्यूं बसदी।। भौं कुछ बोलदा लोग.. बिना दगड़ौ, मनखि एखूली, बोलदा लोग। बुढ्या लोग छौंदा कुटूम नाति नतणौ, एखूलि रैंदा।। भौं कुछ बोलदा लोग......।।           कल्याण सिंह चौहान

एक जनु

 ःःःःःः एक जनु ःःःःःः   एक जनू, नि रैण वक्त सदानी। नी चली, मनमानी कैकि सदानी।। एक जनू.... कभी तीन बेलियू, खांदा खांंणू। कभी बेलियू नि ह्वे, खाणी पदानी।। एक जनू... कभी राज रजौड़ौं, का ठाटबाट। कभी सारु गदनौं, पाणी राणी।। एक जनू... कभी घ्यू दूदा, बगदा गाड गदना। कभी नि मीली, चीणा दाणी।।. एक जनू... रूप रंग नि रै, कै कु सदानी। पंद्रह पच्चीसी, नि रैण सदानी।। एक जनू... कभी घाम ठण्ड, कभी बरखा पाणी। बदुलदु रैदू, मौसम भी सदानी।। एक जनू... वक्त बदुलदू, वक्त नि लगदू। नी रैण झौंतु तेेेरी, जमादानी सदानी।।. एक जनू..                कल्याण सिंह चौहान

जरूरी नहीं

 ःःःः जरूरी नहीं ःःः भूख खाने की ही हो, जरूरी तो नहीं। गले मिलन को ईद ही हो, जरूरी तो नहीं। मुस्कराने की कोई वजह हो, जरूरी तो नहीं।। बोल के ही सब कहा जाए, जरूरी तो नहीं। चांद आसमान में ही हो, जरूरी तो नहीं। सपने नींद में ही देखें जांए, जरूरी तो नहीं।। अकेलापन अकेले में ही महसूस हो, जरूरी तो नहीं। गम भुलाने शराब ही पी जाए, जरूरी तो नहीं। बनाने एक और ताजमहल, मुमताज जरूरी तो नहीं।।            कल्याण सिंह चौहान             ःःःःःःःःःःःः