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Showing posts from July, 2021

अंतिम परीक्षा

 ःःःः  अंतिम परीक्षा  ःःःः           ःःःःःःःःः जीवन की अंतिम परीक्षा, देने की तैयारी है। अपने पाप पुण्य, प्रस्तुत करने की बारी है।। परीक्षा होगी कब, कोई समय निश्चित नहीं है। पर होगी जरूर, टलने का कोई सवाल नहीं है।। होगा आंकलन पूरे जीवन का, लोग परीक्षक होंगे। शून्य बुरे कर्मों के, अच्छे कर्मों के अच्छे अंक होंगे।। मुख्य परीक्षक से साक्षात्कार, अंतिम परीक्षा होगी। फिर पंच तत्व पंच तत्व मे, पूर्ण सम्माहित होगें।। तब न कोई अपना, न कोई पराया जग मे होगा। कहीं स्थिर शांति होगी, कहीं रोना धोना होगा।। हे राम भला इंसान था, स्वर्ग सा सम्मान होगा। अच्छा हुआ बोझ चला गया, नर्क समान होगा।। जीवन की अंतिम परीक्षा, देने की तैयारी है। अपने पाप पुण्य, प्रस्तुत करने की बारी है।।       ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः

मेरी दुनिया

 ःःःः  मेरी दुनिया ःः      ःःःःःःःःःःः मैं अपणी सी दुनिया बसौणू चल्यौं। एक नयू सी संसार सजौणू चल्यौं।। सतयुग सी सच बोलणू चल्यौं। त्रियेतै सी मर्यादा निभौणू चल्यौं। द्वापर सी प्रेम बयार बगौणू चल्यौं।। मैं अपणी सी दुनिया बसौणू चल्यौं। एक नयू सी संसार सजौणू चल्यौं।। प्रभु तै मना फूल चढ़ौणू चल्यौं। मन से मनै ज्योति जगौणू चल्यौं। अफ तै अफी सै मिलौणू चल्यौं।। मैं अपणी सी दुनिया बसौणू चल्यौं। एक नयू सी संसार सजौणू चल्यौं।। मेरा तेरौ भेद मिटौणू चल्यौं। बंद दिल्वा ताला खुणौणू चल्यौं। ठट्ठा मखोलौ रिवाज चलौणू चल्यौं।। मैं अपणी सी दुनिया बसौणू चल्यौं। एक नयू सी संसार सजौणू चल्यौं।।         ःःःः  कल्याण सिंह चौहान ःःःः 

मेरा शरीरै पिड़ा

 ःः  मेरा शरीरै पिड़ा  ःः     ःःःःःःःःःःः मेरा शरीर पिड़ा, मेरी नइ व्यौलि सी ह्वेगी। मेरी घौरवली, सच्ची सौतन सी ह्वेगी वा।। मेरा शरीर मा यन रची बसिगि वा। गौला फंसी, हडगि सी ह्वेगी वा।  हाथ खुटौं बंदी बेड़ि सी ह्वेगी वा। मेरा शरीर पिड़ा, मेरी नइ व्यौलि सी ह्वेगी। मेरी घौरवली, सच्ची सौतन सी ह्वेगी वा।। मेरू दानु शरीर च, अर् ज्वान च वा। मैकु दूर लगी, आमै सी दाणि च वा। सच मा, मेरा अपणा कर्मू फल च वा। मेरा शरीर पिड़ा, मेरी नइ व्यौलि सी ह्वेगी। मेरी घौरवली, सच्ची सौतन सी ह्वेगी वा।। अपणा मर्जी, मेरा अंगसंग ह्वे जांदि वा। हाय तौबा मेरी, जब भी करीब औंदि वा। भलि यनि, मेरी घौरवली पास लौंदि वा। मेरा शरीर पिड़ा, मेरी नइ व्यौलि सी ह्वेगी। मेरी घौरवली, सच्ची सौतन सी ह्वेगी वा।। भग्यान यन, भगवान जी याद करौंदि वा। पास होत, सभी रिस्तादारू मिलौंदि वा। मेरा भला बुरा कर्मुवी याद दिलौंदि वा। मेरा शरीर पिड़ा, मेरी नइ व्यौलि सी ह्वेगी। मेरी घौरवली, सच्ची सौतन सी ह्वेगी वा।।           ःःः।  कल्याण सिंह चौहान  ।ःः

मानव सावधान

 ःःःः  मानव सावधान ःःःः           ःःःःःःःःःःः धरती बरबाद कर, चांद, मंगल पर तू पहुंच चुका। प्राकृतिक सौंदर्य मिटा, पृथ्वी संतुलन तू बिगाड़ चुका।। समृद्ध सनातनी शिक्षा भूल, तू कौन सी शिक्षा पढ़ रहा। विज्ञान विश्व कल्याण को हो, तू विनाश को पढ़ रहा।। अपने सुसंस्कार छोड़, तू प्यार भाव भुला चुका। धौंस जमाने जमाने पर, वैमनस्य तू बढ़ा चुका।। अणु परमाणु जैविक बम बना, तू इठलाता फिरता है। हवा पानी घौले जो जहर, उसे शुध्द करके तो दिखा।। साथ कुछ जाना नहीं, बस अच्चाई ही याद रहनी है। अपना सुख चैन गंवा, क्यों विनाश मार्ग बढ़ रहा।। जिसे तू अब खुश हो, अपना नया अविष्कार कहता है। मानव उन्नति को, सनातन लाखों वर्ष पहले कर चुका।।             ःः कल्याण सिंह चौहान ःः