नशा तेरे प्यार का
नशा तेरे प्यार का ############ ऐसा नशा चढ़ा, तेरे नशीले प्यार का, मैं प्यार के बोल लिखे के, गुनगुनाने लगा, "दिल" निष्पाप, प्यार की दुनिया सजाने लगा।। दिल डूबा है तुम्हारे प्यार में, आंखें देखें तेरी बाट, तुम्हारे सुख की कामना, "दिल" करता दिन-रात।। चाह रहित प्यार मेरा, श्रृद्धा युक्त हुआ व्यवहार, सुखमय वातावरण हुआ, आनंदमय हुआ संसार।। न कोई मेरा अंतर्मन समझे, न कोई समझे मेरा मौन। कहने को बहुत हैं मेरे अपने, पर समझने को है कौन।। जिस प्यार की चाह थी, वह प्यार कभी मिला नहीं। आशा तुम से थी प्यार की, तुमने भी आंखें फेर ली।। तुम से मेरा कोई दिल का, उलझा हुआ रिश्ता लगता है। दूर बहुत हैं हम, रिश्ता तो "दिल" के करीब का लगता है। कल्याण सिंह चौहान "दिल"