Posts

अकेले चल

        अकेले चल        ::::::::::::::: सहारे छूट जाते हैं, अक्सर दोस्त रूठ जाते हैं। अलग पहचान बनाने, अकेले चलना पड़ता है। भरोसे के सहारे, बहुत जरूरी कार्य छूट जाते हैं।।         कल्याण सिंह चौहान "दिल"

प्रेम रंगोत्सव

  "प्रेम रंगोत्सव " ########## अंखियों की पिचकारी है, भाव भंगिमा का है रंग। पास नहीं दूर हैं तो क्या, रंग लें मन से मन का रंग।। ऐसा रंग लगे साथिया, तन लगे रंग जाए मन। तन लगा रंग छूट भी जाए, छूटे ना मन लगा रंग।। रंग गया, रंग गया, मैं तो रंग गया साथिया,                                   तेरे तेरे रंग रंग गया। रंग जा, रंग जा, रंग जा तू भी साथिया,                                      प्रेम रंग, रंग जा।। सब रंगों में रंग रंगीला, प्यारा सुंदर चमकीला। मिलन की आश का हो, या हो बिरह का काला।।            कल्याण सिंह चौहान "दिल"

चाय प्यारी मुझे

           चाय प्यारी मुझे         ================ चाय बहुत प्यारी चाहत है मेरी, सब जगह इसका राज है। कप भर के जहां मिल जाए, वहीं मेरे लिए शुभ कार्य है।। चूल्हा हवन कुंड मेरे लिए, जलती लकड़ी हवन सामग्री है। केतली प्रसाद का वर्तन, उभलती चाय मंदिर का प्रसाद है।। गर्म गर्म चाय देख, मन मेरा बेचैन हो बहुत ललचाता है। घुट एक घूंट पी,  बेजान शरीर में प्राण सा आ जाता है।। सनातन के सोलह संस्कारों में, चाय का ही बोलबाला है। चाय न पूछो तो कहते हैं, चाय की भी औकात नहीं है।। कोई भी कार्य, बैठक, समारोह हो, कभी भी, कहीं भी। पहले चाय से खातिरदारी फिर कार्य, चला नया रिवाज है।                      कल्याण सिंह चौहान "दिल"

प्रभु जाने

         प्रभु जाने         ######## लिखने वाले ने क्या लिखा, लिखने वाला जाने। पढ़ने वाले ने पढ़ के क्या समझा, पढ़ने वाला जाने। सुनने वाले ने सुन के क्या समझा, सुनने वाला जाने। सबके अर्थ/ मतलब एक से हों, यह तो प्रभु जाने।।            कल्याण सिंह चौहान "दिल"

भाव मन के

    भाव मन के     ####### उमड़/चल रहा है, जो भाव तुम्हारे मन में। है क्या वह, जो दिल में दबाए जा रहे हो। साकार होगा कैसे, मन ही मन में बताओ। बताओगे तो हल होगा, जो छुपाए जा रहे हो।। इस जमाने में, किसी के दबाये, दबता कौन है। दवे/कुचले गए से ज्यादा, भला उभरता कौन है। जो बात कल खुल के, सामने आएगी दुनिया में। क्यों उसे सीने में, जबरदस्ती दबाये जा रहे हो।।            कल्याण सिंह चौहान "दिल"

खुद तेरी

 खुद तेरी  //////////// खुद तेरी, खुद तेरी,  मन मा बसिगे, दिल मा रचिगे। खुद तेरी ---- कन कै बिसरौंऊं, कै मा बिसरौंऊं, उमाळ मन की, कौन सौ दिल की, मन मा बसिगे, दिल मा रचिगे। खुद तेरी --- बिसरौंदि नी च, भुलेंदि नी च। औंदि श्वांस, जांदि श्वास। मन मा बसिगे, दिल मा रचिगे। खुद तेरी --- खांदु-पेंदू, उठदु-बैठदू। भरभरांदि आग, घुट-घुट बडुळी। मन मा बसिगे, दिल मा रचिगे। खुद तेरी ---       कल्याण सिंह चौहान "दिल"

दिल के पास

 दिल के पास  ######### दिल मेरे दिल के दिल का, अटूट विश्वास है। जितनी दूर मुझसे, उतने ही दिल के पास है।। दिल, दिल के दिल की, बस यही चाहत है। सिवाय तुम्हारे प्यार के, न कोई चाहत है।। दिल को दिल की गहराइयों से, तुम्हें प्यार है। पता नहीं तुम्हारे सिवाय, कहीं और भी प्यार है।। दिल के दिल की दिल से, हुई दिल्लगी दिल से।  दिल, दिल के दिल की दिल, आए पास दिल से।। प्यार की राह में दो दिल, खिल के मिले दिल से। दो दिल, एक जान, हमराज, हमदर्द हुए दिल से।।           कल्याण सिंह चौहान "दिल"