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Showing posts from November, 2022

फुल्वी पंखूड़ियूं

 # ### "फुल्वी पंखूड़ियूं " #### चल उमा फुल्वी पंखूड़ियूं, अपणा प्यारै दुनिया बसौला। झूठी माया जख क्वी, घोल न होने,  चकड़ैत्वा जख, झूठा बोल न होन। चल उमा फुल्वी पंखूड़ियूं, अपणा प्यारै दुनिया बसौला। बंटरा जख, क्वी ओडा न होन, मौर संगाड़ू जख, क्वी ताळा न होन। चल उमा फुल्वी पंखूड़ियूं, अपणा प्यारै दुनिया बसौला। दिवरु्वी जख क्वी, आंखि कंदुड़ि न होन, आंख्यूं का जख, क्वी शूल न होन। चल उमा फुल्वी पंखूड़ियूं, अपणा प्यारै दुनिया बसौला। क्वी कै कू जख, कांडा न बोन। क्वी जख अपणू, प्यार न खोन। चल उमा फुल्वी पंखूड़ियूं, अपणा प्यारै दुनिया बसौला। कै आंख्यूं जख क्वी, आंसु न होन। जख कै कि हार, कै कि जीत न होन। चल उमा फुल्वी पंखूड़ियूं, अपणा प्यारै दुनिया बसौला।       ## कल्याण सिंह चौहान "दिल" ##                       ## कल्याण सिंह चौहान "दिल" ## नोट -#- बहुत पुराना लिखा हुआ है पर पोस्ट नहीं किया, क्योंकि इस तरह का गीत कोई गा चुके हैं। शुभ कार्य में देर भली नहीं। आपके प्यार व आशीर्वाद की अपेक्षा रखते हैं। दिल से प्रणाम...

खुद तेरी

 :::::::'"खुद तेरी ":::::::          ####### मन मा बसिगे, दिल मा रचिगे, खुद तेरी, खुद तेरी।। कन कै बिसरौंऊं, कै मा बिसरौंऊं, उमाळ मन की, कौ बौ दिल की, मन मा बसिगे, दिल मा रचिगे, खुद तेरी, खुद तेरी।। बिसरौंदि नी च, भुलेंदि नी च, औंदि श्वांस, जांदि श्वास, मन मा बसिगे, दिल मा रचिगे, खुद तेरी, खुद तेरी।। खांदु-पेंदू, उठदु-बैठदू, अंगरै सी आग, घुटघुट बडुळी, मन मा बसिगे, दिल मा रचिगे, खुद तेरी, खुद तेरी।। खुद तेरी, खुद तेरी,                   कल्याण सिंह चौहान "दिल"

मेरा छोटा भाई मनू

 .ःःःःमेरा छोटा भाई मनू....ःःः //////////######///////// दुनिया कुछ कहे न कहे, भाई तो भाई होता है।                 तू तो मेरी मां जाया , मेरा अपना सगा भाई था।                  तू तो भुला चला गया, बचपन के सब किस्से ।।                    हर गलती डांट मुझे मिलती, मैं बड़ा भाई था।।                                                                             जाने से पहले दो तीन दिन, तू मुझको याद करता था।   पिता जी भी कुछ कहते, माफ करना मिल न सका था।    तेरे शरीर के घावों और वेदना को देख, मैं घबराता था।        मेरा सहनशील शेर दिल भाई, कितनी वेदना सहता था।।                  ...

ढलती उम्र -जबाब

  "ढलती उम्र -जबाब" ############# मेरा लिखना, देख के उसकी निस्वार्थ सेवा भाव, "दिल" की कली, सुमन हो खिल उठी।। वह नाराज़ हो गये,  कि तुमने ऐसा क्यों लिखा।। कैसे समझाऊं, किसे समझाऊं, कि किसके लिए लिखा हमने।। मैं जानू, मेरा दिल जाने या मेरे प्रभु जाने, तुम क्यों परेशान, जब तुम्हारे दिल में कुछ नहीं, तुम ही बताओ, तुम ही बताओ।। ::::: कल्याण सिंह चौहान "दिल"::::::