डर लगने लगा
" डर लगने लगा" ########## अपनों की सभा में जाने से, दिल डर लगने लगा। पास बैठ अनजान "स्वरभानु" से, डर लगने लगा।। मुझे नफरत की बात करने, सुनने वालों से नहीं। प्यार से प्यार की बात करने वालों से, डर लगने लगा।। हर तरफ झूठ ही झूठ, झूठ का ही बोलबाला है। सच के मंदिर में भी, सच कहने से डर लगने लगा।। वस्तु क्या, सच-झूठ भी यहां, खरीदा-बेचा जाने लगा। सच-झूठ खरीदने-बेचने न लगूं, दिल डर लगने लगा।। मुझे, मुझ से उच्च सम्मान, चापलूसी में मिलने लगा। मां -प्रभु को भी "तू" कहने से, दिल डर लगने लगा।। कल्याण सिंह चौहान "दिल " नोट- "स्वरभानु" देवताओं की सभा में अमृत पीने बैठा दैत्य है।