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बड़ै तेरी

  बड़ै तेरी  ###### बड़ै-बड़ै-बड़ै तेरी, क्या जी करूं बड़ै तेरी। कथगा जी करूं बड़ै तेरी, बड़ै तेरी, बड़ै तेरी। हीरा-मोती रत्नू बीच, नागमणि रत्न छै तू। नागमणि रत्न छै तू। बड़ै-बड़ै-बड़ै तेरी,---- (छ) ऋतू मा ऋतू, ऋतु बसंत छै तू। ऋतु बसंत छै तू। बड़ै-बड़ै-बड़ै तेरी,---- देवतौं निप्तै, अच्छेड़ि गाय घी कि कमोळि छै तू। घी कि कमोळि छै तू। बड़ै-बड़ै-बड़ै तेरी,---- असौंगा डाळा, दूर ऊंचा फांगा पक्की आमै दाणि  छै तू, आमै दाणि छै तू। बड़ै-बड़ै-बड़ै तेरी,---- बेदी मा कि ब्यौल्यू, सोला सिंगार छै तू। सोला सिंगार छै तू। बड़ै-बड़ै-बड़ै तेरी,----  बड़ै-बड़ै-बड़ै तेरी, क्या जी करूं बड़ै तेरी। कथगा जी करूं बड़ै तेरी, बड़ै-बड़ै-बड़ै तेरी,----                     कल्याण सिंह चौहान "दिल" नोट:-   बड़ै होना चाहिए पर, बडै, बड़ै, बढ़ै में            जो बोलने में सही लगे, अपने स्वरानुसार             प्रयोग करें। धन्यवाद 

बुढ़या/बुढ़ीड़ न बोला

 बुढ़या/बुढ़ीड़ न बोला  ============= बुढ़या/ बुढ़ीड़ न बोला मैं कु, अभी त मैं ज्वान छौं। कूड़ी पै गबयूं ढुंगू , द्वार पटेलौं दगड़ मालद्वार छौं।।  नौन्यालूं दगड़ नौन्याल, ज्वन्वी दगड़ ज्वान छौं। बुढ़ियों दगड़ छ्वालि गत्यू , दिल कु ज्वान छौं।। कै का दिल बस्यूं , कै अपणा दिल बसयूं छौं। कथगि राज जिकुड़ि मेरी,अफ्फु भी एक राज छौं ।। इनि उनि न समझा, औंला दाणियूं स्वाद छौं। खारा दबीं आग, खुंटि टंकीं धारदार तलवार छौं।। कुटरि ब्यूंतै मैं, काकर बुजेड़ि धरियूं बीज छौं। मुलेजेदार मैं, कै कु छी छी कै कु मान सम्मान छौं।।                  कल्याण सिंह चौहान "दिल"

बुढ़ा न बोलो

  बुढ़ा न बोलो  ========== बुढ़ा- बुढ़ा न बोलो मुझे, अभी तो मैं जवान हूं। अनुभवों की खान मैं, पुरानी जिल्द ज्ञान का भंडार हूं।। बच्चों संग बच्चा मैं, जवानों संग जवान हूं। बुढ़ों संग रंगीन मिजाज मैं, हर दिल अजीज हूं।। कितने राज दिल में दबाए मैं, खुद एक राज हूं। राख दबी आग मैं, म्यान रखी धार लगी तलवार हूं।। नींव रखा पत्थर मैं, पारिवारिक बोझ उठाए हूं। गठरी समझौतों की मैं, आपसी सौहार्द बनाए हूं।। किसी के दिल में मैं, किसी को दिल में बसाए हूं  लोकराज से बंधा मैं, वरना किसी से कम नहीं हूं।।          कल्याण सिंह चौहान "दिल"