राहों


वीना लगाया था तुझे, गले अपने।
बनकर साधक, तेरी साधना करूंगा।
क्या मालूम था दिल, खातिर तुम्हारी।
राहों में मैं, मनोरंजन का साधन बनूंगा।।

  कल्याण सिंह चौहान "दिल"

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