बुढ़ा न बोलो

 बुढ़ा न बोलो 
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बुढ़ा- बुढ़ा न बोलो मुझे, अभी तो मैं जवान हूं।
अनुभवों की खान मैं, पुरानी जिल्द ज्ञान का भंडार हूं।।

बच्चों संग बच्चा मैं, जवानों संग जवान हूं।
बुढ़ों संग रंगीन मिजाज मैं, हर दिल अजीज हूं।।

कितने राज दिल में दबाए मैं, खुद एक राज हूं।
राख दबी आग मैं, म्यान रखी धार लगी तलवार हूं।।

नींव रखा पत्थर मैं, पारिवारिक बोझ उठाए हूं।
गठरी समझौतों की मैं, आपसी सौहार्द बनाए हूं।।

किसी के दिल में मैं, किसी को दिल में बसाए हूं 
लोकराज से बंधा मैं, वरना किसी से कम नहीं हूं।।
         कल्याण सिंह चौहान "दिल"


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