नौना- बुवारी
।।।।....नौना..बुवारी....।।।।
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नौनु बोल्दु , मेरि बुवारी मेरि जिन्दगी।
पालि पोसि ब्बे बबुन, ह्वेगेन घौरै गंदगी।
किलै बोन ब्बे बबूई , बिगड़ी च बुवारी।
कैकु बिगड़्यू नौनु अपणु, कै दोष देण।।
बूवारिन कामौ पिछनै बोन, नौन दौड़ी पैलि कन।
पालि पोसि ब्बे बबुन, ह्वेगेन घौरै गंदगी।
किलै बोन ब्बे बबूई , बिगड़ी च बुवारी।
कैकु बिगड़्यू नौनु अपणु, कै दोष देण।।
बूवारिन कामौ पिछनै बोन, नौन दौड़ी पैलि कन।
अपणा ब्बे बबुई दवै देणू भी, नौनै हडगि हैंसदन।
बुवारी पराई घौरे छै, अपणु नौनु भी पराइ ह्वेगी।
छौंदा घौर बार नाति नतणौ, ब्बे बाब एखुलि ह्वेगे।।
खूब धूमधड़कु चैलपैल करी, नौनौ बुवारी करि।
तब बटी वक्तै एक कुल्ली चा भी, हमू हरचिगे।
नातिनतणा भी, ब्बे बबु कि भकलोण्यू मा ऐनी।
नातिनतणो दगिड़ि , बूढ़बुढ्या छुयूं भी तरिसिगे।।
आंखि नी रोंदिन अब, दिल भीतर रोंदू।
छौंदा घौर बार नाति नतणौ, ब्बे बाब एखुलि ह्वेगे।।
खूब धूमधड़कु चैलपैल करी, नौनौ बुवारी करि।
तब बटी वक्तै एक कुल्ली चा भी, हमू हरचिगे।
नातिनतणा भी, ब्बे बबु कि भकलोण्यू मा ऐनी।
नातिनतणो दगिड़ि , बूढ़बुढ्या छुयूं भी तरिसिगे।।
आंखि नी रोंदिन अब, दिल भीतर रोंदू।
गिचु नि बोलदु अब, शक्ल ही बोलदी।
किलै कुछ बोली, अपणु मुख मुलेजु खोण।
भुगतणै होलि भाग मा, भुगतण ही होण।।
किलै कुछ बोली, अपणु मुख मुलेजु खोण।
भुगतणै होलि भाग मा, भुगतण ही होण।।
हर कैमू , अपणि खैरि नि लगौण।
ठठा लगला लोग, जग हंसै भी होण।
क्वी कुछ नि बोलदू, सब वक्त बोलदू।
भौं कैमु नि रोण, रुवै अपणु प्रेम भी खोण।।
जवनी कमई सुधि नि फुकण, बुढापौ भी रखण।
क्वी नि पुछदौ बुढ़ापा मा, टरकणि भटकणि होण।
बाद मा पता चलदू, दानौ बोल्यू अ्र औल्यू स्वाद।
ठठा लगला लोग, जग हंसै भी होण।
क्वी कुछ नि बोलदू, सब वक्त बोलदू।
भौं कैमु नि रोण, रुवै अपणु प्रेम भी खोण।।
जवनी कमई सुधि नि फुकण, बुढापौ भी रखण।
क्वी नि पुछदौ बुढ़ापा मा, टरकणि भटकणि होण।
बाद मा पता चलदू, दानौ बोल्यू अ्र औल्यू स्वाद।
गेड़्यू धन, सौंजड़्या,पल्यू कुत्ता बुढ़ापा का साथी।।
बुढ़ापा मा निरोगी काया अ्र सौंजड़्या साथी।
भ्यारौ सभी सुन्दर, भितर ब्बे बुबौं मरदा लाती।
सभ्यू कु प्रार्थना करदू , जोड़ी अपणा द्वी हाथ।
भलै करी काम अलि, बाकि कुछ नि जाणु साथ।।
...
ःःः कल्याण सिंह चौहान "दिल"
ःःःःःः
बुढ़ापा मा निरोगी काया अ्र सौंजड़्या साथी।
भ्यारौ सभी सुन्दर, भितर ब्बे बुबौं मरदा लाती।
सभ्यू कु प्रार्थना करदू , जोड़ी अपणा द्वी हाथ।
भलै करी काम अलि, बाकि कुछ नि जाणु साथ।।
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ःःः कल्याण सिंह चौहान "दिल"
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