क्या छौं, कु छौं
ःःः क्या छौं, कु छौं ःःःः
कै कु किलै बोलु मैं, अफी सै परेशान छ मैं।। रिस्ता खूनौ जौं से मेरु, ऊंही से ल्वेसार छ मैं।।
ऐ बथौं कभी इन भी चल, पता चलु कैकु छौं मैं।
ज्यूणुं तकौ दुंद, निभौणू म्वन तकौ वक्त देगी मैं।।
बोल्दिन खुशी ह्वे ज्यूण, खुश मुखड़ि बण्यू छ मैं। खड़गदार मनखी निभौंदन रिस्ता, पता छ मैं।।
कै कु किलै बोलु मैं, अफी सै परेशान छ मैं। रिस्ता खूनौ जौं से मेरु, ऊंही से ल्वेसार छ मैं।।
सभी सच नी होंदु कंदुड़ू सुण्यू, अपणा मनै सुणणू छौं मैं।
हैका से अगनै बढ़नै होड़ सभ्यू, क्वी कै कु नी पता च मैं।।
घुसे घुसे नि बणदु क्वी अफरु, अफी बणजांदु पता छ मैं।
पूछी बाटु त मिल जांदु, ठिकणा त अफी जाण पता छ मैं।।
कै कु किलै बोलु मैं, अफी सै परेशान छ मैं। रिस्ता खूनौ जौं से मेरु,ऊंही से ल्वेसार छ मैं।।
हरि कथा, मनखी व्यथा, नि समझदु क्वी, पता छ मैं। अपणौ मा छै खास बात, कसम दे खुलगि पता छ मैं।।
घड़यू पता नीच, साख्यूं कि चिंता, नादानी पता छ मैं।
ब्बे बाबू आशीष फलदु जरूर, नी मनदा क्वी पता छ मैं।।
कै कु किलै बोलु मैं, अफी सै परेशान छ मैं। रिस्ता खूनौ जौं से मेरु, ऊंही से ल्वेसार छ मैं।।
सभी किताब कौफियूं की, रफ कौफी छौं मैं, पता छ मैं। उडणा सभी पन्ना मेरा, बिना जिल्दै किताब छौं,पता छ मैं।।
समझ तुम्हारी पौढ़ा चा नि पौढ़ा, तुम्हारा मनै बात छ मैं। कै कु तै गुफूंज्या, कै कु देवतौं कि भेजीं सौगात छ मैं।।
कै कु किलै बोलु मैं, अफी सै परेशान छ मैं।। रिस्ता खूनौ जौं से मेरु, ऊंही से ल्वेसार छ मैं।।
ःःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःःःः
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