पैबंद



 ःः पैबंद ःः

पैबंद खोला ही था,
जलवा सरेआम करने को,
कि झुक गए सर सभी के,
मूरत जो भगवान की थी ।।

  ःःःःःःकल्याण सिंह चौहानःःःःः

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