खट्टी- मिठ्ठी
।ःःःःखटी-मिठ्ठी ःःःः।।
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धोखा दे जांदू, मां जायूं, पीठयू भै,
साथ दे जांदु दुःख मा, प्यार जायूं दोस्त,
रस्ता ही बडू लम्बू,
एक मन से है का मन जाणौ कूू।।
कै मा नि लगौण छुंई, अपणा बुरा वक्त की,
द्वार पटेल्या भी उठे ली जदन,
लोग उजड़यां कूड़ों का।।
खट्टू, मिठ्ठू, कड़ू, तीखु, लोण्या,
हर चीज कु अपणू अपणू स्वाद च,
अफु बोला त मिठ्ठू, हैकु बोलु त कड़ु,
झूठ का ही, द्वी स्वाद होंदा।।
पिंजरोे मा होयां बंद पशु पक्षीयू,
देखणु जंदन सब चिड़िया घर,
पर क्वी नि दिखदू जानवर, अपणा भीतर कू।।
गजब जमनू, बणै कि रावण अफु,
जलौदं हर साल,
होंदु अच्छू, मिली रावण जलौंदा सभी,
अपणा भीतर का अहंकार कु।।
ःःः कल्याणसिंह चैहानःःः
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