मगर

 ।।ःः मगर ःः।।

आंख रोऐं मगर, आंशू प्यार के हों।
हार जाऐं मगर, खुशी  जीत की हो।
जुदाई हो मगर, विदाई बेटी की हो।।

अंधेरा हो मगर, रात सुहाग की हो।
गिर जाऐंं मगर, जज्बा उठने का हो।
दूर हों मगर, अपने दिल के करीब हों।।

सर झुकाऐं मगर, चरण प्रभु श्री राम के हों।
सर ऊंचा हो मगर, सर पे पिता का हाथ हो।
खुश होऐं मगर, खुशी अपनों के साथ हो।।

      ःःःः  कल्याण सिंह चौहान ःःःः

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