सनातनी- नववर्ष
।।.ःः सनातनी- नव वर्ष.. .ःः।।।
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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, सनातनी नववर्ष आरम्भ।
दया धर्म प्रेम विश्वास, इसके स्थिर चार स्तम्भ।।
आगन्तू स्वागत की, अनोखी सनातनी रीत।
प्रथम नौ दिन नवरात्रि, भजन कीर्तन संगीत।।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, सनातनी नववर्ष आरम्भ।
दया धर्म प्रेम विश्वास, इसके स्थिर चार स्तम्भ।।
ढोल तासे शहनाई बजे, बजे शंख मृदंग।
चौदिशि उत्सव मने, हर मन छाई नई उमंग।।
सुहावना मौसम हुआ, ठण्ड ज्यादा न घाम।
नवे नवरात्रि रामनवमी, प्रकटे प्रभु श्रीराम।।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, सनातनी नववर्ष आरम्भ।
दया धर्म प्रेम विश्वास, इसके स्थिर चार स्तम्भ।।
झूमती फसलें, इठलाते फूल, महकता वातावरण।
ऋतुराज बसतं यौवन पर, धरती बनी नई दुल्हन।।
फूलों संग भौंरे ठिठोली करें, खुशी बौराये आम।
राममयी नववर्ष का, हृदय से स्वागतम स्वागतम।।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, सनातनी नववर्ष आरम्भ।
दया धर्म प्रेम विश्वास, इसके स्थिर चार स्तम्भ।।
।। ःःकल्याण सिंह चौहान "दिल".ःः।।
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