सुपन्या त सुपन्या ह्वे
।ःःःःःःसुपन्या त सुपन्या ह्वे ःःःःःः।।।।
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जब भी मिलदे तू, सुपन्यौं मा मिलदे तू,
कभी समणि ऐकि, मिलि जै तू।।
जब भी मिलदे तू, सुपन्यौं मा मिलदे तू........
सुपन्यौं मा सुपन्या दिखौंदे तू,
सियां अरमानू, फंख लगौंदे तू,
सुपन्यौं से भ्यार, ऐकि मिलि जै तू।।
जब भी मिलदे तू, सुपन्यौं मा मिलदे तू.......
सुपन्यौं रोज औंदे तू,
ऐकि बेचैन कर दे तू,
समिणि मिली, ए भ्रम मिटै जै तू।।
जब भी मिलदे तू, सुपन्यौं मा मिलदे तू....
सुपन्या त सुपन्या ह्वे,
सुपन्या कभी सच्चा नि ह्वे,
समिणि मिली, ईं बात झूठी कर जै तू।।
जब भी मिलदे तू, सुपन्यौं मा मिलदे तू.......
मेरा सुपन्यौं, तु रोज औंदि,
तेरा सुपन्यौं, मैं भी औंदु,
ऐकि अपणा दिलै, बतै जै तू।।
जब भी मिलदे तू, सुपन्यौं मा मिलदे तू.....
सच बोलदा लोग, सुपन्या झूठा,
सुपन्यौं नि औंदु, सच्चु प्यार,
सुपन्यौं केवल शरीरै दरकार।।
जब भी मिलदे तू, सुपन्यौं मा मिलदे तू .......।।
ःःःःःःःःःःकल्याण सिंह चौहान ःःःःःः
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