कालु. गोरी
ःःः कालु . गोरी ःःः
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कल्याण-- तु छैं दाणि ग्यौं कि, मैं दाणि कोदै की।
तु गोरि मैं कालु, हमरि कनकै निभणै की।।
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कल्याण-- तु छैं दाणि ग्यौं कि, मैं दाणि कोदै की।
तु गोरि मैं कालु, हमरि कनकै निभणै की।।
पुुुष्पा-- द्वी मिली ढबड़ि बणी जौला,
द्वी रंग दुनिया का, काना कालु राधा गोरी,
दिल मिलणै बात च,
खूब जमलि हमरि जोड़ी।।
कल्याण--. त्व्वे कु बोलला उजुलू दिन,
मैं कु कालि रात,
बोलला दिन रात कनकै रैला साथ।।
पुुुष्पा-- दुनिया त दुनिया च कुछ भी बोलदी,
कु नि जणदु, दिन रात मिलदा द्वी बार,
दिल मिलण से, मन का फूल खिलदा।।
कल्याण-- काला गोरौ भेद दुनिया करदी,
क्वी मुख पै, क्वी पीठ पिछनै बोलि मरदी,
दुनिये सुणि सूणी तु भी बदलि जैली।।
पुुुष्पा- काला गोरौ भेद प्यार नि करदु,
हमरि भी खूब जमलि जोड़ी,
रात दिना मिलण पै,
सुप्रभात शुभसंध्या होली।।
ःःः कल्याण सिंह चौहान ःःः
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