पहाड़ याद करुणू

 

।ःःःःपहाड़ याद करुणूःःःः।।
       ःःःःःःःःःःःः
पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू,
हिंवली डांडि कांठी, घाटा-बाटा,
गौं-गुठियार, याद करणू
ऐ जा प्रदेसी,  अपणा पहाड़..

पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू,
झिझक बुबा की, मां कु लाड़-प्यार। 
लोण रोठी, घ्यू कि गोंदगी। गुड़ै डौळी,
याद करणी, ऐ जा प्रदेसी, अपणा पहाड़ ...

पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू,
भै बैणौं कू, मिलि बांटि खाणू।
ठंड्यूं राती, ढिकाण खैंचुणू,
मेरु भै भुल्ला, दीदि भुल्ली बोलुणू,
याद करणू, ऐ जा प्रदेसी, अपणा पहाड़..

पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू,
बुवे-बुबा, काका-काक्या, 
बोडा-बोड्या खुटा सेवा सौंळी, 
दाना सयणौं कु, चौंठी भुक्की पेणू,
याद करणू, ऐ जाव प्रदेसी, अपणा पहाड़..

पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू,
स्वालि-पकोड़ी, फांणु-थिचोंणी।
खटइ-बाड़ि, माळुवा पत्तों फौड़ौ भात,
याद करणू, ऐ जा प्रदेसी, अपणा पहाड़..

पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू,
बाणु बुतुणू, मल्लि-मुल्ली, वल्ली-पल्ली सारी।
कल्यौ खाणु, मोंडा बैठी, 
याद करणू, ऐ जा, प्रदेसी, अपणा पहाड़...

पहाड़ू का, रैवासी, प्रवासी, भै बंदू,

          ःःःकल्याण सिंह चौहान "दिल" ःः

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