तेरा सुपन्या
।ःःःः तेरा सुपन्याःःःः।।
ःःःःःःःःःःःः
न फेर, न फेर तु तैं, स्वांणी मुखड़ी,
तेरी मुखड़ी मैं, अपणू अक्स दिखेंदू।।
न ढकौ, न ढकौ चदरी तू, तैं प्यारी सुरत,
स्या चदरी मैं, अपणी बैरी सी लगदी।।
न हो, न हो तू मेरी, क्वी बात नी च,
मैं अपणू सब कुछ, तेरू सी लगदू।।
न बण, न बण तू, यन अणमणी सी,
दिल मैं अपणू, जख्म सी लगदू।।
न फर फर फरक तू, मैं देखी,
आश मैं अपणी, टुटदी सी लगदी।।
सुपन्यौं सुपन्यौं मा तू, इनि औंदी रैई,
तेरा सुपन्या ही मैं, अपणा सी लगदा।।
ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःः
ःःःःःःःःःःःःःःःःःः
Comments
Post a Comment