पैलु मिलन
।।....पैलू मिलणू....।।।
ःःःःःःः ःःःःः
तेरि स्वाणि मुखड़यू रंगरूप देखी।। जुकुड़ी धकध्याट, रंगबिरंगा भाव उमड़ी,
कुतगलि लगै, हंसै रुलै, मेरा मन प्रेम जोग जगिगे।। .
तेरि झिलमम लाल बिंदुलि देखी। .
तेरि झिलमम लाल बिंदुलि देखी। .
आंख्युं कु खुलण बंद होण,
अंगअंग, रोमरोम खिलुणू,
मेरा मन अखण्ड प्रेम ज्योत जगैगी।।
तेरि कलस्यणि शर्मिलि आंख्यों कु मिलणु।
मिली कि झुकुणु, झुकी की फिर उठणों,
लज्जै कि फिर मिलणु।।
मेरा मन प्रेम सागर डुबैगी।।
तेरि खुट्यू कि झंवरयूं की छुणछुण सुणी।
सुरताल, गीत संगीत,
राग रागणि सभी साज बजैगे।।
मेरा मन प्रेम राग रचैगे।।
तेरि बिगरैलि खुट्यू ठुमठुम हिटुणु देखी।
बगछटबणी,शर्मलाज छोड़ी,
रंगमतु बणी, होश हवाश गंवै।।
मेरा मन तेरु प्रेम नशा चढींगे।।।
मेरा मन अखण्ड प्रेम ज्योत जगैगी।।
तेरि कलस्यणि शर्मिलि आंख्यों कु मिलणु।
मिली कि झुकुणु, झुकी की फिर उठणों,
लज्जै कि फिर मिलणु।।
मेरा मन प्रेम सागर डुबैगी।।
तेरि खुट्यू कि झंवरयूं की छुणछुण सुणी।
सुरताल, गीत संगीत,
राग रागणि सभी साज बजैगे।।
मेरा मन प्रेम राग रचैगे।।
तेरि बिगरैलि खुट्यू ठुमठुम हिटुणु देखी।
बगछटबणी,शर्मलाज छोड़ी,
रंगमतु बणी, होश हवाश गंवै।।
मेरा मन तेरु प्रेम नशा चढींगे।।।
ःःःः कल्याण सिंह चौहान "दिल":::::: ःःःःःःःःःःःःः
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