नौ वर्ष गढ़वाली

 

       ।ःः। नौ वर्ष (गढ़वाली)ःः।।।

फुलेरि ऋतु बसंत, ज्यूंदै जोन, आकाश गैणां।
सनातनी नौ वर्ष शुरू, पैल्या नौंर्ता चैत मैना।।

 र्नौतौं नौ दिन, द्वौ देवतों की पाठ पूजा।        
 व्रत शुध्द तनमन, चसू ज्यादा न घाम।।
 ठोल दमौ बजदु, बजदु शंख मृदंग घांड।
 नवां नौर्ता रामनवमी, प्रकटे प्रभु श्रीराम।।

 फुलेरि ऋतु बसंत, ज्यूंदै जोन, आकाश गैणां।
 सनातनी नौ वर्ष शुरू, पैल्या नौंर्ता चैत मैना।।      

 चैत घुघूती घुरैली, खुद लगलि खुदेड़ मैना।    ‌
 चैत नौबत बजलि, लगला थड़ियां गीत।        
 चखुलों का घोलू , नया जीवनै चुंइच्याट।        
 चैत मैना घरु मंदिरू देळी, फूलदेई रीत।।    

  फुलेरि ऋतु बसंत, ज्यूंदै जोन, आकाश गैंणां।
  सनातनी नौ वर्ष शुरू, पैल्या नौंर्ता चैत मैना।।        

  रंग बिरंगा फूलून, डांडी कांठि ईठलौणी होली।         
  सतरंगी चदरी ओढी, धरती ब्योलि बणी होली।।        
  ग्यों जौ कि भोरी सारि, मन रमस्योंणी होली।           
  फ्योंली. मुल हैंसी, अफी अफ शर्मेणी होली।।   
  
  फुलेरि ऋतु बसंत, ज्यूंदै जोन, आकाश गैणां।
  सनातनी नौ वर्ष शुरू, पैल्या नौंर्ता चैत मैना।।    

              कल्याण सिंह चौहान "दिल"

        

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