मैल


बहारी मैल धोऐं सब,  धोए न कोई मन को मैल ।।
मन को मैल धुलन से, सारी दुनिया बंदे तेरे गैल ।।

ःःःःकल्याणसिंह चौहानःःःःः

Comments

Popular posts from this blog

प्रेम रंगोत्सव

बुढ़ा न बोलो

बड़ै तेरी