मात-पिता की सेवा
।ःःःःमात-पिता की सेवा ःःःः।।
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मात पिता की सेवा से बढ़कर, न कोई पुण्य काम।
कहती है दुनिया, मात पिता के चरणों चारों धाम।।
दुनिया में मातृ पित्र भक्त, प्रसिद्ध हुए श्रवण कुमार।
कन्धे बैठा अंन्धे मात पिता को, ले गए तीर्थ स्थान।।
मां गीले बिस्तर सोई, पिता ने पसीने से तर किया काम।
मात पिता का ऋण न उतरे, उतर जाए सब अभिमान।।
बन गमन कर गए, मात पिता की आज्ञा का रख मान।
तीनों लोकों आज्ञाकारी पुत्र, प्रसिद्ध भगवान श्री राम।।
मां सुबह की सुहावनी धूप है, पिता दिन के तेज घाम।
मात पिता का आशीष लेकर, कठिन नही कोई काम।।
चरण बंदना मात पिता की, करा परिक्रमा का विधान।
तीनों लोकों प्रथम पूज्य बने, गौरीसुत गणेश भगवान।।
मात पिता को धोखा देकर, याद रखो समय बलवान।
जिनसे इतना लाड़ तुम्हें, देंंगे तुम्हें भी वे वही सम्मान।।
अधर मे लटके पित्रों को, तरपन देकर मुक्ति दिलाई।
पित्र ऋण चुका के, प्रसिद्ध ऋषि जरत्कारु महान।।
मात पिता की सेवा से बढ़कर, न कोई पुण्य काम।
कहती है दुनिया, मात पिता के चरणों चारों धाम।।
ःःःःःःकल्याण सिंह चौहान "दिल" ःःःःःः
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