वक्त अर जमनु
।।ःःःवक्त अर जमनु ःःः।।
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वक्त अर जमना कि बात च,
बाकी कै कि क्या औकात च।।
वे वक्त, चट रोटि, पट दाल,
खाई रोटि, मारि फाल,
एकलसी का तीन काल,
कुटनी,पिसणि, पाणि सार।।
अबै वक्त, उठण कपाल घाम,
खंतड़ों मा चा कु डाम,
पेस्ट, फेसियल, नेट श्रेष्ठ,
खान्दु पेन्दु मुन्या हाल।।
वक्त अर जमना कि बात च,
बाकी कै कि क्या औकात च।।
वे वक्त , कुग्रार बुद्धि,
अंठोसदार, झुकी आंखि,
भग्यनु कू भग्यान,
चलकै निंद, स्कूल्या ध्यान।।
अबै वक्त, उल्टु इलम,
फिल्म, चिलम, नेट, दारू नीट,
सब दगड़ चीट, दिमाग रीतु कु रीत,
एक पीट हैकु पीट।।
वक्त अर जमना कि बात च,
बाकी कै कि क्या औकात च।।
वे वक्त, की बात च,
दर्जी की दगड़ स्यूण,
जनन दगड़ दथडु फंकुलु,
बामण दगड़ बल पतडु।।
अबै वक, जनन मू शीशा क्रीम पौडर,
दर्जी गैन हरचि,
बामण कम्प्यूटर बण्याण।
वक्त न सभी हल्याण।।
वक्त अर जमना कि बात च,
बाकी कै कि क्या औकात च।।
वे वक्त, ब्बै बुब्बा,
बोडा बोडी, काका काकी,
दिदा भुल्ला, बैण भण्जा,
सेवा सौंली छाई।।
अबै वक्त ,मौम डैड,
बाकी सभी बुनै, अंकल आंटि,कजिन,
दगड़ मां हलौ हाई, टाटा,
बाई-बाई हेव ग्यैना।।
वक्त अर जमना कि बात च,
बाकी कै कि क्या औकात च।।
।।ःःःःः कल्याणसिंह चैहानःःःःः।।
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