दिवाली


     ःःःः  दिवाली  ःःःः
         
जगमग रौशन, दिवाली के दियों की रौशनी।  
कीर्ति पताका आपकी, जग लहराये हरदम।।

फुलझड़ियां हों , खुशियों की लड़ियां।
फुस होें, जीवन के सारे दुःखदर्द गम।।
यश फैले आपका, मिले मान सम्मान।
भंडारे भरें हों, कभी खुशी न हों कम।।

जगमग रौशन, दिवाली के दियों की रौशनी। 
कीर्ति पताका आपकी, जग लहराये हरदम।।

दुःखों भरी अमावस्या, क्षण में छंट जाय।
मिले स्वच्छ चांदनी सी, प्यार की सौगात।।
वैमनस्य पास न आये, हो जग  कल्याण।
जग हो नाम आपका, वजनी हो हर बात।।

जगमग रौशन, दिवाली के दियों की रौशनी। 
कीर्ति पताका आपकी, जग लहराये हरदम।।

दिया शरीर, गम तेल, दुःख होेंऐं बाती।
बचपन के से दिन, सुहाग की सी रातें।।
पितृ हस्त सर हो, संस्कारी हो परिवार।
बंधु बांधव एकजुट हों, घर राम दरबार।।

जगमग रौशन, दिवाली के दियों की रौशनी। 
कीर्ति पताका आपकी, जग लहराये हरदम।।

       ।ःःकल्याणसिंह चैहान "दिल"::::          

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