नौ तेरू
।।ःःःः नौ तेरू ःःःः।।।
देखि ज्वा तेरी, स्वांणी मुखड़ी,
मैं अपणी , शुदबुद ख्वै ग्यौं।।
मिली ज्वा त्वै से, नजर मेरी,
मैं आंखी झपझौण, भूली ग्यौं।।
याद मा तेरी,मैं दुनियादारी भूली ग्यौं।।
मिलण का छणू मा तेरा,
मैं अफी तैं भूली, जड़ ह्वे ग्यौं।।
औणै आहट से तेरी,
मैं सब भूली, त्वे मा रम ग्यौं।।
ऐ, हवा ज्वा, तेरा तरफै,
मैं श्वास लेणू, भूली ग्यौं।।
तेरा प्यार मा, ज्यीणू,
मैं ज्यीणू, भूली ग्यौं।
प्यार एक तीस, बुझै नि बुझदी,
मैं प्यारे तीस, पे की हारी ग्यौं।
ःःःः कल्याण सिंह चौहान "दिल"
ःःःःःःःःःःःः
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