हिन्द की सेना
।।ःःःःहिन्द की सेना ःःःः।।
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गर्व है हमें अपने हिन्द,
हिन्द सेना के वीर सपूतों पर।
रात अंधियारे सुस्ता रहे थे जब,
वीर जवान गलवान घाटी पर।
चीनी कायरों ने धोखे से कर दिया वार,
भारत के जवानों पर।
धीर अधीर न हुऐ, झट उठ खड़े हुए,
चीनियों की छाती पर।।
उन्नीस सौ बासठ का भारत नहीं अब,
ऐ चीन ये तेरी भूल है।
एक वीर जसवंत नहीं अब,
जसवंत के वंसजों की फौज है।।
असफलता सरकारी थी,
जिसने कमी की फौजी सामान की।
सुसज्जित हथियारों से देश अब,
और केंद्र मे शेरों की टोली है।।
और केंद्र मे शेरों की टोली है।।
चीन तेरी खैर नहीं,
हिन्दी चीनी भाई भाई अब नहीं चलने को।
तेरे खून से रंग देगें हम,
तेरे झंडे के रंग अब तेरे मिट्टी पानी को।।
दिल से नमन, देश के खातिर जान गंवाई,
उन वीर सपूतों को।
तुम्हारा बलिदान व्यर्थ न होगा,
मजबूर है चीन मुंह की खाने को।।
वे अपनी मां के दलाल हैं,
जो करते चीनी गुणगान को।
चीनी सामान का बहिष्कार करो,
अपने देश के सम्मान को।।
जो करते चीनी गुणगान को।
चीनी सामान का बहिष्कार करो,
अपने देश के सम्मान को।।
देश का हर नागरिक तैयार है अब,
देश के खातिर बलिदान को।
अभी हनुमान जी को देखा,
चीन देखेगा अब चक्र त्रिशूल को।।
।।ःःकल्याण सिंह चौहान"दिल" ःः।।
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