माया
।।.......माया......।।।।
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माया माया बोल्दिन सभी, कनी माया ह्वे।
मेरी माया तेरी माया, कै कि जी माया ह्वे।।
मेरी माया तेरी माया, कै कि जी माया ह्वे।।
माया कू मुण्डरो कै, कै माया को बुखार ह्वे।
माया कू ढंगचोल कै, कै माया को खुमार ह्वे।।
जवनी कि माया कै, कै रंगरूप माया ह्वे।
आंखि मायादार कै की, कै मनै माया ह्वे।।
माया माया बोल्दिन सभी, कनी माया ह्वे।
मेरी माया तेरी माया, कै कि जी माया ह्वे।।
मेरी माया सच्ची तेरी माया झूठी, सभी बोल्दिन।
समझी सकी, निभै सकी जैन, माया त माया ह्वे।।
माया मायदार कै कि, कै कि माया ढकी छुपी रे।
चार दिनौ कू मायो भम्र सभ्यू, माया त माया ह्वे।।
माया माया बोल्दिन सभी, कनी माया ह्वे।
मेरी माया तेरी माया, कै कि जी माया ह्वे।।
माया की माया मा लगी माया, कनी माया ह्वे।
माया माया करदु लेडूबी माया, संसरि माया ह्वे।।
माया माया मा रै माया, अछूति माया से माया रे।
यु लोक सुधरी परलोक सुधरी, प्रभु कि माया ह्वे।।
माया माया बोल्दिन सभी, कनी माया ह्वे।
मेरी माया तेरी माया, कै कि जी माया ह्वे।। .
ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः .
ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः .
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