अपणा- बिरणा

 
                 ःःःःअपणा-बिरणाःःःः।।
                ःःःःःःःःःःःःःःःः 

 ठेसण्या बोली छोड़ी, प्यारा बोला दुई बोल।
 लाखै चीज मिलदी, प्यार मा माटा सी मोल।।
           
 बिरणा, अपछणा, बटोयूं अगनै रोणू नीच।
 बुकरा-बुकरी रूै, माया अपणी खोण नीच।
 छुयांल मुण्ड मलासी, झूटू दिलासु दिखाला।
 पीठ पिछनै हंसी मजाक, खूब ठठ्ठा लगाला।
        
 ठेसण्या बोली छोड़ी, प्यारा बोला दुई बोल।
 लाखै चीज मिलदी, प्यार मा माटा सी मोल।।
             
 भीतरै बात, अपणा भीतर रैजाउ त सोने च।
 खुसर-फुसर बात फैली त, लंका फुकेणी च।
 बोलदन जू बिदे गेन, बिदेकी मोती बणी गैनी।
 दूधै उमाल, सर उमली जग्यू चुलु बुझे गैनी।।

 ठेसण्या बोली छोड़ी, प्यारा बोला दुई बोल।
 लाखै चीज मिलदी, प्यार मा माटा सी मोल।।
           
 होण बाण्या भयू कि तिबरि, राम दरबार सजलू।
 अणमेल भयू का कटमचुरै, लाठि बलेंडी बजलू।
 हुरसा हुरसी मौ बणि, ठेसाठेसि गौं उजाड़ होदू।
 लाटु-कालु जनी भी होलू, अपणू अपणू ही होंदू।।

 ठेसण्या बोली छोड़ी, प्यारा बोला दुई बोल।
 लाखै चीज मिलदी, प्यार मा माटा सी मोल।।
           
  जौं घरू बैण भण्जों, दिशा ध्याणी की  आश। 
  उं भयों का सौ कारोबार, होण खाण की राश।
  द्यो देवतों, ब्बे बूबै दगड़, पितरों कू तिरस्कार।
  वख शैदोलि,भूत, हंत्या,भैरों, नरसिंग कु बास।।

   ठेसण्या बोली छोड़ी, बोला प्यारा दुई बोल।
   लाखै चीज मिलदी, प्यार मा माटा सी मोल।।
           
   जू मोरी बिंडि खै मोरी, इच्छि खै क्वी नी मोरी।
   पखणु छोटा बिटी खलौणू, ज्येठा बिटी बिवोणू।
   सौ बातै एक चुप भली, हर बात पै नी रिसाणू।
   सभी रूठ्या त, कैन बोलण बचाणू, कैन मनाणू।।

   ठेसण्या बोली छोड़ी, प्यारा बोला दुई बोल।
   लाखै चीज मिलदी, प्यार मा माटी का मोल।।

         ।।ःःःःःकल्याणसिंह चैहानःःःःः।।
                 ःःःःःःःःःःःःःःःःःः

Comments

Popular posts from this blog

प्रेम रंगोत्सव

बुढ़ा न बोलो

बड़ै तेरी