प्यार
।।ःःःःप्यारःःःः।।
ःःःःःःःःःः
हक न शक, तेरू न मेरू,
लेण की न, केवल देणै बात,
भीतर, भ्यार बस एक ही गुदगुदी,
अपनापन कु एहसास,
यू ही सच्चू प्यार च।।
जाण न पैचाण, हो न हुजत,
एक होणै, जल्दी जिद,
लेण देणै हर वक्त बात,
यु प्यारा नौ धोखा च।।
आदम्यू , कै औरत से,
सच्चा प्यारौ बादु, हर कसम,
प्यारा नौ, केवल छल च,
इरादू केवल, अंगसंग च।।
याद करी करी, पहला मिलण,
हमेशा याद रखी वे मिलण,
बिना लोभ लालच, सब लुटौणू तैयार,
सच्चू प्यार औरतौ, आदमी से।।
।।ःःःकल्याणसिंह चौहानःःः।।
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