औकात
।ःःःः औकात ःःःः।।
ःःःःःःः
चिफली गिचिन, झूठ बोलणू नी आयो हम,
खरखरु बोली, कथगा आंंख्यूं खटगणा छा हम।।
चिफलैस मा फिसलणै डौर, आज भी भोल भी,
नाकुणै सी कणांक बोली, बुरा त भला भी हम ।।
मानि कि लोखू जनू, भौं कुछ नि कमै हमन,
खुश छौं, ठोकर खै खै उठ्यों, सीदा बोटों भी गिरौं।।
अपणी खुशियों कु, क्वी कभी नि गिरै हमन,।
जैं पुरै नि सकदां, वीं बात नि कर दा हम।।
अपणी औकात पता च, औकात मा ही रेैंदा हम,।
न कैसै ज्यादा चांदा, न अपणी मेहनत से कम।।
तमन्ना त कुछ विशेेष करने रख दां हम भी।
क्वी हमरा खुटौं दब्बू, इन तरक्की नी चांदा हम।।
बुलदियों पर पौछण, क्वी बड़ी बात नीच,
सच्चाई च, जमीना सिवा क्वी जगह नी बैठणू।।
अपणी बोली बात याद रखणै, आदत नी मेरी,
रखु भी किलै, पता च मैं, सच सच च, बदलदू नी।।
।।ःःःकल्याणसिंह चैहानःःःः।।
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