बेटी
।ःःःःबेटी ःःः।।
ःःःःःः
देवतों से उत्पन्न, दुनिये उत्पत्ति बेटी,
देवतौं स्वरूप, धरती आईं बेटी।।
झूठ पराई, बेटी मैत सैसुरौ ।
सच, संसरि रिस्ता, निभौणे पराकाष्ठा बेटी।।
ब्बे बब्बू बेटी, नौण घी कि कमौली,
घौर मंदिर, बणौणै दिया बत्ती बेटी।।
ब्बे बबुवा दिलै किताबै, सच्ची राजदार बेटी,
ब्बे बबुई दारु दवैई, हदै मयली च बेटी।।
ब्बे कि सहेलि, सच्ची मददगार च बेटी,
बुब्बै हिम्मत, मेहनतै उत्साह च बेटी।।
असली गुरु ब्वै बब्बी, पैरोकार च बेटी,
झगड़ा ब्बे बबुवा, सुलझौणै जज च बेटी।।
ब्बे बबुवा संस्कारौं कि, पहचान च बेटी,
भग्यनू प्रभुई देईं, सच्ची सौगात च बेटी।।
ःःःःकल्याण सिंह चौहान "दिल" ःःःः
Comments
Post a Comment